Thursday, July 25, 2024
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वैज्ञानिकों को मिला ‘पाताल लोक’, बीते चार दशकों से लगातार निकल रही है आग

Patallok: क्या आपको पता है कि वैज्ञानिक सिर्फ आसमान में ही नहीं धरती के नीचे भी खोज करने में लगे हैं। हाल ही में वैज्ञानिकों ने पाताल लोक का पता लगा लिया है। आज हम आपको यह बताएंगे कि यह रिपोर्ट कहां के वैज्ञानिकों ने तैयार की है और उसकी क्या सच्चाई है? यह गड्ढा कोई मामलू गड्ढा नहीं है, जिसे साल 1971 में डोर टू हेल का नाम दिया गया था। यह धधकता हुआ गड्ढा तुर्कमेनिस्तान की राजधानी में स्थित है, जो लंबे समय से वैज्ञानिकों और पर्यटकों के लिए पहेली बना हुआ है। तुर्कमेनिस्तान की राजधानी अश्गाबात से 260 किलोमीटर उत्तर में काराकुम रेगिस्तान है। इसमें एक 100 फीट गहरा और 230 फीट चौड़ा गड्ढा पिछले कुछ दशकों से वैज्ञानिकों और पर्यटकों के बीच पहेली बना हुआ है। इस गड्ढे को 1971 में नरक का द्वार (Door To Hell) नाम दिया गया था। दरअसल, इसके अंदर से बीते चार दशकों से लगातार आग निकल रही है। इसका कारण इसके अंदर खतरनाक गैस बह रही हैं।

1000 डिग्री सेल्सियस का धधकता तापमान

इस गड्ढे का 1000 डिग्री सेल्सियस का धधकता तापमान है। इस कारण आज तक यहां सिर्फ एक ही आदमी पहुंच सका है। कनाडा के रहने वाले जॉर्ज कोरोनिस 2013 में इस आग के कुंड में उतरने पाले पहले शख्स थे। वह उस अभियान का हिस्सा थे, जो ये पता लगाना चाहता था कि धधकते गड्डे के अंदर क्या जीवन संभव है? क्या वहां कोई ऐसा बैक्टेरिया मौजूद है, जो इतने तापमान पर भी जिंदा हो? और इसके अंदर कौन-कौन सी जहरीली गैसें मौजूद है?

भयानक गर्म तापमान और जहरीली गैस मौजूद

इसके लिए वैज्ञानिक जॉर्ज ने दो साल की तैयारी की थी। वह यहां 17 मिनट तक रुके और वापस आकर उन्होंने जो बातें बताई वो एलियंस को लेकर किए जा रहे कई दावों को सच बताती हैं। इस जगह के तल की मिट्टी में कुछ बैक्टीरिया पाए, जो इस गर्म तापमान में भी रह सकते हैं। इसी आधार पर वैज्ञानिकों में ये उम्मीद जागती है कि सूरज के आसपास के ग्रहों पर एलियन मौजूद हो सकते हैं। क्योंकि वहां भी भयानक गर्म तापमान और जहरीली गैस मौजूद हैं।

मिट्टी, राख और गैस के सेंपल लाए

जॉर्ज कहते हैं- वो 17 मिनट मेरे दिमाग में बहुत गहराई से बस चुके हैं। ये बहुत डरावना और मेरी सोच से कई गुना बड़ा और गहरा था। जॉर्ज इस गड्डे के तल तक उतरे थे और वहां से कुछ मिट्टी, राख और गैस के सेंपल लाए थे। वह बताते हैं कि जब वह बीच रास्ते में थे, तो उनके मन में ख्याल आ रहे थे कि उनका सूट साथ देगा या नहीं। या जिन रस्सियों से वह बंधे हैं, वह बीच में टूट तो नहीं जाएंगी।

आग लगातार जल रही

यहां आग कैसे लगी इसके बारे में कई कहानियां मौजूद हैं। इनमें से एक ये है कि 1971 में सोवियत संघ के वैज्ञानिकों ने यहां ड्रिलिंग की थी। लेकिन जब इसके अंदर से जहरीली गैस का रिसाव होने लगा तो इसे रोकने के लिए उन्होंने यहां आग लगा दी। और उसी समय से यह आग लगातार जल रही है। यह तस्वीरें और जानकारी X हैंडल @CureBore से पोस्ट की गई, जिसे खबर लिखे जाने तक 20 लाख व्यूज और छह हजार से अधिक लाइक्स मिल चुके हैं।

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