Wednesday, February 21, 2024
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Uttarkashi Tunnel: उत्तरकाशी सुंरग हादसे में बचाव कार्य जारी, 67 फीसदी ड्रिलिंग का काम पूरा, जल्‍द मिलने वाली है खुशखबरी

Uttarkashi Tunnel Collapse: उत्तराखंड के उत्तरकाशी की सिलक्यारा सुरंग में दिवाली के दिन अचानक भूस्खलन हो गया और वहां काम कर रहे 41 मजदूर अंदर ही फंस गए। मलबा इतना ज्यादा था कि श्रमिकों को निकालने के लिए बीते 11 दिन से बचाव अभियान चलाया जा रहा है। टीमें दिन रात सुरंग में बचाव अभियान चला रही हैं। 41 जिंदगियां बचाने के लिए 42 मीटर तक एक पाइप डाला गया है। ड्रिलिंग का काम 67 फीसदी पूरा हो चुका है। सुरंग के अंदर फंसे मजदूरों को अब पका हुआ खाना मिलने लगता है। इसके साथ ही वीडियो कम्युनिकेशन होने से फंसे हुए लोगों का मनोबल बढ़ा है।

ऱेस्क्यू को विभिन्न सरकारी एजेंसियों को किया तैनात

41 लोगों के सेफ ऱेस्क्यू को सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न सरकारी एजेंसियों को तैनात किया गया है। सभी को विशिष्ट कार्य सौंपे गए हैं। रेस्क्यू अभियान पर सलाह देने के लिए नेशनल और इंटरनेशनल टनलिंग एक्सपर्ट साइट पर मौजूद हैं। अधिकारियों का कहना है कि सब कुछ ठीक रहा तो आज रात तक रेस्क्यू ऑपरेशन खत्म होने की उम्मीद है। सबसे पहले सुरंग में फंसे मजदूरों की संख्या 36 बताई गई थी। फिर इनकी संख्या 40 बताई गई। इसके एक सप्ताह बाद कंपनी ने 41 लोगों के फंसने की बात कही।
बचाव अभियान में भारतीय सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, बीआरओ, एनएचआईडीसीएल, उत्तराखंड पुलिस, एसजेवीएनएल, आरवीएनएल, लार्सन एंड टूब्रो, टीएचडीसी, आपदा प्रबंधन विभाग, जिला प्रशासन, ओएनजीसी, आईटीबीपी, राज्य लोनिवि, डीआरडीओ, परिवहन मंत्रालय, होमगार्ड्स जुटे हैं। बचाव अभियान में छह प्लान पर काम किया जा रहा है। सुरंग के मुहाने से ऑगर मशीन से ड्रिलिंग, बड़कोट छोर से ड्रिलिंग, सुरंग के ऊपर और दाएं व बाएं तरफ से ड्रिलिंग, सुरंग के ऊपर से ड्रिलिंग की योजना तैयार की गई।

अत्याधुनिक तकनीकों का किया इस्तेमाल

विशेषज्ञों की टीम ने अत्याधुनिक तकनीकों का भी इस्तेमाल किया। डीआरडीओ के 70 किलो के दो रोबोट यहां पहुंचे थे, लेकिन रेतीली मिट्टी होने के कारण वह चल नहीं सके। यहां ड्रोन से भी तस्वीरें लेने की कोशिश की गई, लेकिन कामयाब नहीं हुई। इंटरनेशनल टनलिंग और अंडरग्राउंड स्पेस एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रो. अर्नोल्ड डिक्स को भी बुलाया गया। साथ ही हिमाचल में सुरंग हादसे में मजदूरों को बचाने वाली टीम को भी यहां बुलाया गया।

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