Sunday, July 14, 2024
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अमेरिकी चंद्रयान भी नहीं रच सका चंद्रयान-3 जैसा इतिहास, चांद पर लैंड होते ही जमीन में धंस गये पैर


अमेरिकी चंद्रयान: ओडीसियस को एक सप्ताह के मिशन के लिए चंद्रमा पर भेजा गया था। इसने उम्मीदों के मुताबिक अच्छा प्रदर्शन किया। इंटुएटिव मशीन्स ने 22 फरवरी को ओडीसियस के लैंडर को सफलतापूर्वक चांद पर उतारा था। यह चंद्रमा पर उतरने वाली अमेरिका की पहली निजी कंपनी बन गई। इस उपलब्धि ने उन्हें जापान सहित उन कुछ देशों में शामिल कर दिया, जिन्होंने 1960 के दशक के बाद से ऐसी लैंडिंग पूरी की है। 11 घंटे की गड़बड़ी के बावजूद यह छह पैरों वाला स्पेसक्राफ्ट पिछले गुरुवार को सफलतापूर्वक चंद्रमा की सतह पर पहुंचा था। लेकिन इसकी लैंडिंग थोड़ी अजीब हुई। भारत के चंद्रयान-3 की तरह इसकी लैंडिंग एकदम सीधी नहीं हुई। यह झुका हुआ चांद पर उतरा जिससे यह किसी ऑपरेशन को अंजाम देने में कामयाब नहीं हो पाया। अमेरिका का एक अंतरिक्ष यान (स्पेसक्राफ्ट) चांद की सतह पर एक सप्ताह तक तड़पने के बाद गुरुवार को गहरी नींद में सो गया। ओडीसियस नाम का ये स्पेसक्राफ्ट एक सप्ताह पहले ही लॉन्च किया गया था। यह एक प्राइवेट अमेरिकी कंपनी इंटुएटिव मशीन्स का स्पेसक्राफ्ट है। हालांकि चंद्रमा पर लैंड होते ही इसका एक पैर टूट गया और यह तिरक्षा हो गया। इसके बाद काफी कोशिशें की गईं लेकिन इसे खड़ा नहीं किया जा सका। आखिरकार धरती पर इसके कंट्रोलर ने इसे गुरुवार को सुला दिया। गुरुवार को ओडीसियस से आखिरी इमेज प्राप्त करने के बाद इसको कंट्रोल करने वाले वैज्ञानिकों ने इसके कंप्यूटर और पावर सिस्टम को स्टैंडबाय मोड में डाल दिया। यह एहतियाती कदम इसलिए उठाया गया है ताकि इस लैंडर को दो से तीन सप्ताह बाद फिर से जगाया जा सके। इंटुएटिव मशीन्स के प्रवक्ता जोश मार्शल के अनुसार, आखिरी समय में उठाए गए कुछ कदमों के चलते लैंडर की बैटरियां तेजी से खत्म होने लगी थीं। इसलिए इसके डेड होने से पहले उसे लंबे समय तक गहरी नींद में सुला दिया गया है। कंपनी ने एक्स पर लिखा, गुड नाइट, ओडी। हमें उम्मीद है कि हम आपसे फिर मिलेंगे। स्पेसक्राफ्ट की लैंडिंग से लैंडर ओडीसियस के सोलर पैनल और कम्युनिकेशन सिस्टम में दिक्कतें आ गईं। हालांकि चुनौतियों का सामना करने के बावजूद, इंटुएटिव मशीन्स के लैंडर, ओडीसियस ने कंपनी की शुरुआती उम्मीदों को पार कर लिया। ओडीसियस नासा के कॉमर्शियल लूनर डिलीवरी प्रोग्राम में एक महत्वपूर्ण कदम है। दरअसल निजी कंपनियों के पिछले प्रयास सफल नहीं हुए थे। जनवरी में एक लैंडर दुर्घटनाग्रस्त होकर पृथ्वी पर वापस आ गया था।

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