Pakur SP Amarjeet Balihaar Murder Case में झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने पाकुड़ के तत्कालीन एसपी अमरजीत बलिहार की हत्या से जुड़े बहुचर्चित नक्सल मामले में फांसी की सजा पाए दो दोषियों — सुखलाल उर्फ प्रवीर मुर्मू और सनातन बास्की उर्फ ताला दा — की सजा संशोधित करते हुए उम्रकैद में बदल दी। दोनों पर 10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है और भुगतान न करने पर तीन महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
जस्टिस गौतम कुमार चौधरी की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि डेथ रेफरेंस नंबर 04/2018 का जवाब “नहीं” में दिया जाता है, यानी दोषियों को फांसी देने का पर्याप्त आधार नहीं है। हालांकि, ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई दोषसिद्धि को पूरी तरह बरकरार रखा गया है। सिर्फ सजा को फांसी से आजीवन कारावास में बदला गया है।
इस मामले में इससे पहले खंडपीठ के दो जज अलग-अलग राय दे चुके थे। जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय ने दोषियों को फांसी से बरी करने का आदेश दिया था, जबकि जस्टिस संजय प्रसाद ने ट्रायल कोर्ट की फांसी की सजा को सही ठहराया था। मतभेद के कारण मामला एकल पीठ को भेजा गया, जिसकी सुनवाई 11 नवंबर 2025 को पूरी हुई और अब अंतिम निर्णय सुनाया गया है।
Pakur SP Amarjeet Balihaar Murder Case 2 जुलाई 2013 की उस घटना से जुड़ा है, जब दुमका जिले में नक्सलियों ने पुलिस दल पर घात लगाकर हमला किया था। इस भीषण हमले में एसपी अमरजीत बलिहार समेत छह पुलिसकर्मियों की मौत हुई थी। जांच के बाद कुल चार आरोप पत्र दायर किए गए थे।
मामले में गिरफ्तार दो नक्सलियों — सुखलाल और सनातन बास्की — को विशेष न्यायाधीश हसन की अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी, जबकि पांच अभियुक्तों को संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया गया था। हाईकोर्ट के इस नए आदेश से अब इस मामले की सजा में बड़ा बदलाव आ गया है।









