इंदौर : देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के भागीरथपुरा में नर्मदा जल सप्लाई के नाम पर नागरिकों को मानव मल-मूत्र मिला पानी पिलाया जा रहा था. इसका खुलासा गुरुवार को एमजीएम मेडिकल कालेज और नगर निगम की लैब में हुई सैंपल की जांच के बाद हुआ है. इस पानी में ई-कोलाई और शिगेला जैसे घातक बैक्टीरिया मौजूद थे, जो मानव मल में पाए जाते हैं.
पीने का पानी सुरक्षित माना जाता है, लेकिन अगर वही पानी बीमारी और मौत की वजह बन जाए तो सवाल पूरे सिस्टम पर उठता है. इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद यह साफ हो गया है कि समस्या सिर्फ एक शहर तक सीमित नहीं है. इंदौर के साथ ही भोपाल, उज्जैन, रतलाम, ग्वालियर, सागर और रीवा समेत अन्य शहरों में भी लोगों को पीने का स्वच्छ पानी नहीं मिल रहा है.
इस तरह पानी में मिल रहा मानव मल
जल आपूर्ति की पाइपलाइनें, नालों और सीवेज चेंबरों के भीतर या उनसे सटकर गुजर रही हैं. जरा-सी लीकेज, प्रेशर ड्रॉप या पाइप टूटने की स्थिति में सीवेज का पानी सीधे सप्लाई लाइन में मिल जाता है. जिससे मानव मल से पैदा होने वाले खतरनाक बैक्टीरिया पीने के पानी तक पहुंच जाते हैं. यही बैक्टीरिया डायरिया, टाइफाइड, हैजा और हेपेटाइटिस और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों को जन्म देते हैं.
दूषित पानी से हर साल 2 लाख लोगों की मौत
नीति आयोग की समग्र जल प्रबंधन सूचकांक की रिपोर्ट बताती है कि सुरक्षित पानी न मिलने से हर साल भारत में करीब दो लाख लोगों की मौत होती है. रिपोर्ट यह भी कहती है कि यदि नहीं अभी भी नहीं चेते तो 2030 तक देश की करीब 40 प्रतिशत आबादी जल संकट का सामना कर सकती है. निजी सर्वे तो दावा करते हैं कि दूषित पानी से हर साल 20 लाख से ज्यादा लोगों की जान जा रही है. सवाल यह है कि जब खतरा इतना बड़ा है, तो व्यवस्था अब भी क्यों सो रही है?
भोपाल में 80 प्रतिशत टंकियों की सफाई नहीं
भोपाल में जलापूर्ति व्यवस्था गंभीर सवालों के घेरे में है. शहरवासियों को सीवेज-पानी साथ-साथ सप्लाई हो रहा है. नगर निगम के 80 फीसदी ओवरहेड टंकियों की समय पर सफाई नहीं होने से पीने के पानी की गुणवत्ता पर खतरा बढ़ गया है. करीब 20 लाख आबादी को सप्लाई होने वाला पानी कई इलाकों में गंदगी, लीकेज और जर्जर पाइपलाइनों से होकर घरों तक पहुंच रहा है. टंकियों की महीनों से सफाई नहीं होने और सीवेज लाइनों के पास से गुजरती पाइपलाइनों के कारण दूषित पानी सप्लाई का खतरा लगातार बढ़ रहा है. इंदौर में हुई मौतों के बाद भोपाल में भी ऐसी त्रासदी की आशंका से लोग सहमे हुए हैं.
उज्जैन में टंकियों में जमा कीचड़, क्षतिग्रस्त लाइनों का सुधार
इंदौर की घटना के बाद उज्जैन नगर निगम और पीएचई विभाग भी पेंडिंग शिकायतों को निपटाने में लग गया है. हालांकि शहर में अब भी कई परिवार ऐसे हैं, जो गंदा पानी पीने को मजबूर हैं. वहीं कुछ लोग फ़िल्टर पानी खरीद कर पी रहे हैं. वहीं उज्जैन शहर की पानी की टंकियों के कई ऐसे फोटो भी आए, जिनमें साफ देखा जा सकता है कि इन टंकियों में नीचे कीचड़ जमा हुआ है. हालांकि अब इन टंकियों की सफाई की जा रही है.
उज्जैन नगर निगम कमिश्नर अभिलाष मिश्रा ने बताया पीएचई विभाग द्वारा पीएचई कंट्रोल रूम एवं चामुंडा माता स्थित कंट्रोल रूम के माध्यम से शिकायतों का निराकरण किया जाता है.
रतलाम में एनजीटी का आदेश भी बेअसर
मध्य प्रदेश में जल संकट को लेकर चिंता बढ़ गई है, लेकिन रतलाम में हालात उससे भी ज्यादा भयावह बने हुए हैं. नगर निगम क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 32 सहित कई इलाकों में महीनों से लोगों को सीवरेज मिला बदबूदार और कीड़ों वाला पानी पीने को मजबूर होना पड़ रहा है. स्थानीय लोगों की शिकायतें, जनसुनवाई, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और यहां तक कि एनजीटी के निर्देश भी बेअसर साबित हुए हैं. हालात ऐसे हैं कि रतलाम में भी इंदौर जैसी त्रासदी की आशंका गहराती जा रही है.
भोपाल निगम आयुक्त बोली- अलर्ट मोड पर भोपाल
भोपाल नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने बताया कि भोपाल शहर में जहां से भी दूषित पानी को लेकर शिकायतें मिल रही हैं, वहां सैंपलिंग करवाई जा रही है. बीते दो दिन में 177 स्थानों से पानी के सैंपल लिए गए और इनकी जांच की गई. लेकिन इन सब स्थानों पर पानी स्वच्छ मिला है. जैन ने बताया कि शुक्रवार को भी शाम 6 बजे तक 75 सैंपल लिए गए हैं. जहां से भी दूषित पानी की शिकायत आ रही है और तुरंत नगर निगम की टीम को भेजा जा रहा है. जिन स्थानों पर पानी की पाइन लाइनें नालों से होकर गुजर रही है, ऐसी लाइनों की शिफ्टिंग के लिए भी कार्य योजना तैयार कर रहे हैं.
दूषित जल से कैंसर जैसी घातक बीमारियों का खतरा
भोपाल में जय प्रकाश चिकित्सालय के पूर्व अधीक्षक डॉ. आईके चुघ बताते हैं कि जल में मुख्यतः आर्सेनिक, फ्लोराइड और नाइट्रेट, औद्योगिक एवं कृषि अपशिष्ट, माइक्रोप्लास्टिक, चिकित्सीय कचरा आदि मिला होता है. तांबा, शीशा, क्रोमियम और रेडियोधर्मी पदार्थ भी जल स्रोतों के संपर्क में आने पर जल को दूषित कर जानलेवा बना देते हैं. डॉक्टर चुघ ने बताया कि दूषित पानी डायरिया, हैजा, टाइफाइड और मलेरिया जैसी जानलेवा बीमारियों की जड़ है. बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक पेट दर्द, दस्त, उल्टी, बुखार और कैंसर जैसी बीमारियों से जूझ रहे हैं.









