Magh Month की शुरुआत के साथ ही एक बार फिर धर्म, आस्था और पुण्य का विशेष काल आरंभ हो गया है। माघ माह एक फरवरी तक चलेगा और इस दौरान स्नान, दान, जप और तप का महत्व सौ गुना बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माघ में किया गया पुण्य कर्म व्यक्ति को मोक्ष की ओर अग्रसर करता है। यही कारण है कि बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा स्नान और कल्पवास के लिए प्रयागराज पहुंच रहे हैं।
धार्मिक ग्रंथों में माघ माह में गंगा स्नान को अत्यंत फलदायी बताया गया है। मान्यता है कि इस महीने गंगा जल में स्नान करने से जीवन के कई दोष दूर हो जाते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है। कल्पवास करने वाले श्रद्धालु पूरे माह संयमित जीवन, सात्विक भोजन और नियमों के साथ दिनचर्या का पालन करते हैं। जो लोग गंगा तट तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, वे घर पर स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं और प्रतिदिन भगवान का जलाभिषेक कर पुण्य लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार माघ माह के कृष्ण पक्ष में किसी भी तिथि का क्षय नहीं होता, जबकि शुक्ल पक्ष में चतुर्दशी तिथि का क्षय माना जाता है। इस कारण माघ के व्रत और पर्व विशेष फलदायी होते हैं। इस महीने सूर्य उपासना, भगवान विष्णु की पूजा और देवी आराधना का विशेष महत्व है।
Magh Month में कई प्रमुख पर्व और व्रत मनाए जाएंगे। 13 जनवरी को लोहड़ी, 15 जनवरी को मकर संक्रांति (कुछ पंचांगों के अनुसार 14 जनवरी), 6 जनवरी को संकष्टी गणेश चतुर्थी, 14 जनवरी को षटतिला एकादशी, 18 जनवरी को मौनी अमावस्या और 19 जनवरी से गुप्त नवरात्र की शुरुआत होगी। 23 जनवरी को बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा, 25 जनवरी को रथ सप्तमी, 26 जनवरी को भीष्म अष्टमी और 29 जनवरी को जया एकादशी मनाई जाएगी। एक फरवरी को माघी पूर्णिमा के साथ माघ मेले का समापन होगा और इसी दिन संत रविदास जयंती भी श्रद्धा के साथ मनाई जाएगी।









