कांग्रेस में अनुशासन पर सवाल, बड़े नेताओं के आगे बेबस दिखी समिति

0
8

भोपाल।  मध्य प्रदेश कांग्रेस में नेताओं और कार्यकर्ताओं की शिकायतों को लेकर अनुशासन समिति की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं. खुद अनुशासन समिति के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह ने माना है कि पार्टी के भीतर भितरघात को लेकर लगातार बातें तो होती हैं, लेकिन कोई भी नेता लिखित में शिकायत देने को तैयार नहीं है. ऐसे में बिना किसी ठोस शिकायत और सबूत के कार्रवाई करना संभव नहीं है. राजेंद्र सिंह ने कहा कि कांग्रेस के कई नेता मंचों और बैठकों में पार्टी के भीतर मौजूद भितरघातियों की बात उठाते हैं, लेकिन जब उनसे लिखित शिकायत मांगी जाती है तो कोई आगे नहीं आता. उन्होंने साफ कहा कि जब शिकायत ही दर्ज नहीं होगी तो अनुशासन समिति कार्यकर्ताओं या नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा किस आधार पर करे।

शिकायत के बाद समिति नोटिस जारी करती है

अनुशासन समिति की बैठकों को लेकर राजेंद्र सिंह ने बताया कि जब भी कोई औपचारिक शिकायत आती है, समिति बैठक करती है, संबंधित व्यक्ति को नोटिस जारी किया जाता है और जवाब भी लिया जाता है. लेकिन अगर कोई नेता शिकायत ही नहीं करता तो समिति के हाथ बंधे रहते हैं. उन्होंने दो टूक कहा कि उन्हें सिर्फ मटेरियल चाहिए, क्योंकि मटेरियल मिलेगा तभी आगे की कार्रवाई संभव है।

विधायक अजय सिंह ने समिति के काम पर खड़े किए सवाल

राजेंद्र सिंह ने यह भी स्वीकार किया कि कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें नोटिस तो जारी किए गए और जवाब भी लिए गए, लेकिन उसके बाद भी कोई ठोस एक्शन नहीं हो सका. कांग्रेस के भीतर अनुशासन समिति के फैसलों और उसकी कार्यप्रणाली को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं. इससे पहले चुरहट से विधायक अजय सिंह ने भी अनुशासन समिति के कामकाज पर सवाल खड़े किए थे. उन्होंने कहा था कि शिकायत होने के बावजूद कई मामलों में कोई कदम नहीं उठाया जाता और वही कार्यकर्ता या नेता बाद में चुनाव के दौरान पार्टी को नुकसान पहुंचाते हैं।

इन मामलों में जारी हुए नोटिस

नीमच में यूथ कांग्रेस का स्वागत विवाद सामने आया. 30 दिसंबर 2025 को गांधी भवन नीमच में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अमर्यादित आचरण के मामले में यूथ कांग्रेस को नोटिस जारी किया गया. जिला युवा कांग्रेस के सचिव राहुल अहीर और विधानसभा युवा कांग्रेस के अध्यक्ष सरवन कुमार सेन को 24 घंटे के भीतर जवाब देने के निर्देश दिए गए थे. हालांकि, इसके बावजूद आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।

शिकायत के बाद सुरजीत सिंह चढ्ढा को पद से हटाया था

साल 2024 में कैलाश विजयवर्गीय के स्वागत को लेकर भी विवाद हुआ था. कांग्रेस नेताओं ने इस पर आपत्ति जताई, जिसके बाद तत्कालीन अध्यक्ष सुरजीत सिंह चड्ढा को नोटिस जारी किया गया. बाद में सुरजीत सिंह चड्ढा को पद से हटा दिया गया और चिंटू चौकसे को अध्यक्ष बनाया गया. इसके बाद दिग्विजय सिंह के स्वागत को लेकर चिंटू चौकसे का बयान सामने आया. इस मामले में भी दोनों नेताओं को नोटिस जारी हुए, लेकिन आज तक पार्टी की ओर से किसी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

उज्जैन में जिला अध्‍यक्ष की घोषणा के बाद हुआ था बवाल

उज्जैन में संगठन सृजन अभियान के तहत शहर जिला अध्यक्ष की घोषणा के बाद भी बवाल मचा. उज्जैन शहर अध्यक्ष महेश परमार को लेकर स्थानीय कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया. कई मामलों में जिला अध्यक्ष को दरकिनार कर कार्यकर्ताओं ने अलग से प्रदर्शन किए. इस पर महेश परमार ने शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पार्टी ने नोटिस जारी किया. लेकिन जिन कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई होनी थी, वे बड़े नेताओं की शरण में पहुंच गए और पूरा मामला वहीं ठंडे बस्ते में चला गया।

लक्ष्मण सिंह पर हाईकमान को लेना पड़ा सीधा फैसला

राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी को लेकर अपने बयानों के कारण चर्चा में रहे लक्ष्मण सिंह के मामले में प्रदेश स्तर पर किसी नेता ने औपचारिक आपत्ति दर्ज नहीं कराई. यहां तक कि अनुशासन समिति ने भी कोई कार्रवाई नहीं की. अंत में हाईकमान को खुद हस्तक्षेप करना पड़ा और लक्ष्मण सिंह को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया।

बिना लिखि‍त शिकायत के कैसे होगी कार्रवाई

राजेंद्र सिंह का मुख्य तर्क यही है कि अनुशासन समिति सुनी-सुनाई बातों के आधार पर कार्रवाई नहीं कर सकती. नेताओं द्वारा सार्वजनिक मंचों पर भितरघात की बात तो की जाती है, लेकिन लिखित शिकायत और ठोस सबूत देने से सभी बचते हैं. प्रक्रिया के तहत बिना मटेरियल नोटिस जारी करना और कार्रवाई करना संवैधानिक रूप से कठिन है. यही वजह है कि कई मामलों में नोटिस जारी होने के बावजूद अंतिम निर्णय नहीं हो पाता और मामले अधर में लटक जाते हैं।