पत्नी को कुल्हाड़ी से मारा, शव चौराहे तक घसीटा; कोटा डबल मर्डर में कोर्ट का फैसला

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उदयपुर|राजस्थान के कोटा जिले में पांच साल पहले सामने आए एक दिल दहला देने वाले डबल मर्डर केस में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। पत्नी को कुल्हाड़ी से काटकर चौराहे तक घसीटने और फिर छह माह के मासूम बेटे की निर्मम हत्या करने वाले दोषी पिंटू (45) को एडीजे कोर्ट-2 ने मृत्युदंड की सजा सुनाई है। अदालत ने इस जघन्य अपराध को ‘रेयर ऑफ द रेयरेस्ट’ श्रेणी में रखते हुए कहा कि दोषी में मानवता नाम मात्र भी शेष नहीं बची थी।यह फैसला अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सरिता धाकड़ की अदालत ने सुनाया। फैसले में कोर्ट ने न केवल अपराध की क्रूरता पर विस्तार से टिप्पणी की, बल्कि समाज पर पड़ने वाले इसके भयावह प्रभाव को भी रेखांकित किया। न्यायालय का मानना है कि ऐसे अमानवीय कृत्य पर मृत्युदंड से कम सजा न्याय के उद्देश्यों को पूरा नहीं कर सकती।

पांच साल पुराना है रूह कंपा देने वाला मामला

यह खौफनाक वारदात करीब पांच साल पहले कोटा के रामपुरा थाना क्षेत्र में हुई थी। अभियोजन के अनुसार, घरेलू विवाद के चलते पिंटू ने पहले अपनी पत्नी पर कुल्हाड़ी से ताबड़तोड़ वार किए। गंभीर रूप से घायल पत्नी को वह घसीटते हुए चौराहे तक ले गया। इस दौरान उसकी गोद में छह माह का मासूम बेटा भी था, जिसे बाद में उसने मौत के घाट उतार दिया। इस बर्बरता से पूरे इलाके में दहशत फैल गई थी।हत्या के बाद आरोपी ने किसी तरह का पश्चाताप नहीं दिखाया। वारदात को अंजाम देने के बाद वह पैदल ही रामपुरा थाने पहुंचा और पुलिस से कहा, “मैंने अपनी पत्नी को मार डाला है, मुझे गिरफ्तार कर लो।” पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शवों को कब्जे में लिया और आरोपी को हिरासत में लेकर जांच शुरू की।फैसला सुनाते हुए जज सरिता धाकड़ ने दोषी की मानसिकता पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, “दोषी का दायित्व अपने परिवार की रक्षा करना था, लेकिन जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो परिवार में कौन सुरक्षित रहेगा?”अदालत ने अपने आदेश में लिखा कि लोग जानवरों तक को परिवार का हिस्सा मानते हैं और उन्हें नुकसान नहीं पहुंचाते, लेकिन पिंटू ने अपने ही खून के रिश्तों के साथ जो किया, वह उसकी पैशाचिक, निर्दयी और राक्षसी प्रवृत्ति को दर्शाता है।

‘रेयर ऑफ द रेयरेस्ट’ की कसौटी पर खरा उतरा मामला

कोर्ट ने अपने निर्णय में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय ‘रेयर ऑफ द रेयरेस्ट’ सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा कि यह मामला उसी श्रेणी में आता है। अपराध की योजना, क्रियान्वयन की क्रूरता, पीड़ितों की असहाय स्थिति और समाज पर पड़ने वाला प्रभाव—इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मृत्युदंड को ही एकमात्र उपयुक्त सजा माना गया।

अभियोजन पक्ष का तर्क

अभियोजक भारत सिंह आसावत ने अदालत में दलील दी कि यदि ऐसे अपराध में दोषी को कठोरतम सजा नहीं दी गई, तो यह समाज में गलत संदेश देगा। उन्होंने कहा कि न्याय का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि समाज में कानून का भय स्थापित करना भी है। कोर्ट ने अभियोजन की दलीलों से सहमति जताते हुए कहा कि ऐसे अपराधियों के प्रति नरमी न्याय व्यवस्था के प्रति आमजन के विश्वास को कमजोर कर सकती है।

प्रदेश भर में चर्चा का विषय

इस फैसले के बाद पूरे प्रदेश में यह मामला चर्चा का केंद्र बन गया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय न केवल पीड़ित परिवार के लिए न्याय है, बल्कि समाज के लिए एक कड़ा संदेश भी है कि अमानवीय अपराधों के प्रति कानून कोई रियायत नहीं देगा। कोटा डबल मर्डर केस में आया यह फैसला अपराधियों के लिए चेतावनी और न्याय प्रणाली की दृढ़ता का प्रतीक माना जा रहा है।