नंदी के किस कान में कहनी चाहिए मनोकामना, शिव वाहन से ही क्यों कहते हैं विश?

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भगवान शिव के मंदिरों में पूजा-अर्चना करने के बाद कई श्रद्धालु शिवलिंग के सामने बैठे नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामना कहते हैं. देश के लगभग हर शिव मंदिर में यह दृश्य आम है कि भक्त नंदी के पास जाकर धीरे से उनके कान में अपनी इच्छा व्यक्त करते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि मनोकामना नंदी के कान में ही क्यों कही जाती है, सीधे भगवान शिव से क्यों नहीं? साथ ही, यह भी सवाल उठता है कि नंदी के किस कान में अपनी मनोकामना कहनी चाहिए क्योंकि बहुत से लोगों को इस बात की जानकारी नहीं है. साथ ही अपनी मनोकामना कहने का नियमों के साथ सही तरीका भी जानें…
भगवान शिव के वाहन नंदी महाराज कौन हैं?
भगवान शिव के वाहन नंदी महाराज को नंदिकेश्वर या नंदी देव के नाम से जाना जाता है. हिंदू धर्म में, नंदी को शिवजी का वाहन और उनका सबसे प्रिय भक्त माना जाता है. सभी शिव मंदिरों में, नंदी की मूर्ति गर्भगृह की ओर शिवलिंग की ओर मुख करके बैठी हुई मुद्रा में स्थापित की जाती है. नंदी शिव की ध्यान साधना में लीन रहने का प्रतीक हैं. उन्हें कैलाश का रक्षक और शिव का द्वारपाल माना जाता है.

नंदी महाराज का विशेष स्थान क्यों?
नंदी महाराज को भगवान शिव का परम भक्त, वाहन और गण माना गया है. शास्त्रों के अनुसार नंदी महाराज ना केवल शिव के द्वारपाल हैं बल्कि उनके सबसे विश्वासपात्र भी हैं. पुराणों में वर्णन मिलता है कि भगवान शिव कोई भी बात नंदी की उपस्थिति के बिना नहीं सुनते. यही कारण है कि नंदी महाराज को शिवजी और भक्त के बीच संदेशवाहक माना गया है. मान्यता है कि जो बात नंदी महाराज तक पहुंचती है, वह बिना किसी बाधा के सीधे भगवान शिव तक पहुंच जाती है. इसलिए भक्त अपनी मनोकामना नंदी के माध्यम से शिव तक पहुंचाने की परंपरा निभाते हैं.

नंदी के कान में ही क्यों कही जाती है मनोकामना?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नंदी को गोपनीयता और विश्वास का प्रतीक माना जाता है, यही कारण है कि मनोकामना धीरे और कान में कहने की परंपरा है. इसके पीछे एक भावनात्मक पक्ष भी है, नंदी महाराज सदा ध्यानमग्न अवस्था में शिवजी की ओर देखते रहते हैं. जब भक्त उनके कान में अपनी इच्छा कहता है तो यह माना जाता है कि नंदी महाराज उसी क्षण शिवजी का ध्यान उस मनोकामना की ओर आकर्षित कर देते हैं.
किस कान में कहें मनोकामना?
यह सवाल सबसे ज्यादा पूछा जाता है कि नंदी के किस कान में मनोकामना कहनी चाहिए. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नंदी के दाहिने कान यानी राइट हैंड साइड की तरफ के कान में मनोकामना कहना सबसे शुभ माना जाता है. दाहिना कान धर्म, सकारात्मक ऊर्जा और देव कृपा से जुड़ा माना गया है. कुछ शास्त्रों में उल्लेख है कि दाहिना कान शिव तत्व का वाहक है. हालांकि कुछ स्थानों पर स्थानीय परंपराओं के अनुसार बाएं कान में भी मनोकामना कहने की प्रथा मिलती है, लेकिन शास्त्रीय मान्यता दाहिने कान को ही प्राथमिकता देती है.

नंदी महाराज से मनोकामना कहने के नियम
नंदी महाराज के कान में मनोकामना कहने के भी कुछ नियम बताए गए हैं. बिना शिव दर्शन किए सीधे नंदी के पास जाना उचित नहीं माना जाता. कई मंदिरों में नंदी को छूना वर्जित होता है। दूरी बनाए रखते हुए झुककर मनोकामना कहें. शास्त्रों में कहा गया है कि नंदी केवल धर्म और कल्याण से जुड़ी इच्छाएं ही शिव तक पहुंचाते हैं. जब इच्छा पूर्ण हो जाए, तो शिव और नंदी का आभार व्यक्त करना आवश्यक माना गया है. नदीं महाराज के कान में मनोकामना कहने से पहले ॐ नमः शिवाय मंत्र का जप करना चाहिए और फिर मनोकामना कहनी चाहिए. मनोकामना कहते समय अपने दोनों हाथों से अपने होठों को ढक लेना चाहिए ताकि कोई और उसे सुन ना सकें.