देवास में नगर निगम की तानाशाही, वार्डों में ट्यूबवेल की बिजली काटी

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देवास | 07 फ़रवरी 2026 ​देवास नगर निगम द्वारा पिछले कुछ दिनों में शहर के विभिन्न वार्डों में की गई कार्रवाई ने नगरवासियों को भारी जल संकट के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। निगम की टीम द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना या सार्वजनिक नोटिस के मोहल्लों में लगे सार्वजनिक ट्यूबवेल (बोरिंग) के बिजली कनेक्शन काट दिए गए हैं और वहां से स्टार्टर किट भी जब्त कर लिए गए हैं। नगर निगम की यह कार्रवाई सीधे तौर पर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) का उल्लंघन है, जिसके तहत स्वच्छ पेयजल पाना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। म.प्र. नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956 के अनुसार, पेयजल एक 'अनिवार्य सेवा' है। किसी भी अनिवार्य सेवा को बंद करने से पहले उचित वैकल्पिक व्यवस्था और पूर्व सूचना देना कानूनी रूप से अनिवार्य है।

​क्या नगर निगम ने यह सुनिश्चित किया है कि जिन वार्डों में बोरिंग बंद की गई है, वहां के 100% घरों में नर्मदा जल सुचारू रूप से पहुँच रहा है? ​बिना वैकल्पिक नल कनेक्शन दिए सार्वजनिक जल स्रोत को बंद करना किस नियम के तहत उचित है? ​बिजली बिल के बकाया या अन्य तकनीकी कारणों की सजा आम जनता को प्यासा रखकर क्यों दी जा रही है? यदि नगर निगम प्रशासन 24 घंटे के भीतर इन ट्यूबवेलों के कनेक्शन बहाल नहीं करता है और स्टार्टर वापस नहीं लगाता है, तो नागरिकों द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की जाएगी। साथ ही, इस "प्रशासनिक असंवेदनशीलता" की शिकायत राज्य मानवाधिकार आयोग और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर सामूहिक रूप से की जाएगी।