बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत जागरूकता वाहन को हरी झंडी दिखाकर किया गया रवाना

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मधुबनी। बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत मधुबनी समाहरणालय परिसर से उप-निदेशक सह जिला जनसंपर्क पदाधिकारी, परिमल कुमार, पुलिस उपाधीक्षक, मुख्यालय, रश्मि, सहायक निदेशक, सामाजिक सुरक्षा, नितेश पाठक, सी.डबल्यू. सी. अध्यक्ष, रविन्द्र कुमार, वरीय उप समाहर्ता, सिम्पा ठाकुर के द्वारा संयुक्त रूप से जागरूकता वाहन को हरी झंडी दिखाकर  रवाना किया गया। इस अवसर पर सचिव, सर्वो प्रयास संस्थान, निर्मला कुमारी, केश वर्कर, वीणा चौधरी, हरि कुमार सन्नी सहित अन्य उपस्थित थे। बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत चाइल्ड हेल्पलाइन एवं सर्वो प्रयास संस्थान के द्वारा जागरुकता वाहन के माध्यम से लोगो को बाल विवाह के प्रति खबरदार करने के उद्देश्य से बताया जा रहा है कि बाल विवाह एक अपराध है। बाल विवाह कराने और करवाने वाले को 2 साल तक की सजा और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। 18 वर्ष से कम आयु की लड़की और 21 वर्ष से कम आयु के लड़के का विवाह बाल विवाह है। ऐसे विवाह को संपन्न कराना, करवाना या उसमें भाग लेना दंडनीय अपराध है। आइए हम सब मिलकर बाल विवाह मुक्त भारत का निर्माण करें। इस अवसर पर सभी अधिकारियों द्वारा बाल विवाह के उन्मूलन के प्रति अपने दृढ़ संकल्प को व्यक्त करते हुए हस्ताक्षर अभियान में भी भाग लिया गया। बाल विवाह करवाने वाले दोषी माता-पिता तथा 3 रिश्तेदारों को 2 साल तक की सजा और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकता है। बाल विवाह करवाने वाले पंडित, मौलवी एवं पादरी को भी सज़ा हो सकती है। बाल विवाह के लिए अपनी सेवा देने वाला नाई, हलवाई, बैंड एवं टेंट वाले अथवा जो भी वहाँ शामिल होंगे उन्हें 2 साल तक की सजा और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। साथ ही बाल विवाह में शामिल होने वाले व्यक्ति को भी 2 साल तक की सजा और 1 लाख तक का जुर्माना या दोनों हो सकता है।