फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को हर वर्ष महाशिवरात्रि का व्रत किया जाता है और इस बार यह शुभ तिथि 15 फरवरी दिन रविवार को है. महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का एक बहुत बड़ा और खास पर्व है, जिसे शिव भक्त हर साल बड़े ही श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव पहली बार निराकार स्वरूप से साकार रूप में प्रकट हुए थे और इसी दिन भगवान शिव का माता पार्वती से विवाह हुआ था अर्थात शिव और शक्ति का मिलन इसी रात हुआ था. इस बार महाशिवरात्रि पर 300 साल बाद 8 योग का शुभ संयोग बन रहा है, जिससे इस दिन का महत्व बढ़ गया है. आइए जानते हैं महाशिवरात्रि पूजा का महत्व, पूजा मुहूर्त और शिव-पार्वती पूजन विधि…
महाशिवरात्रि का महत्व
पुराणों के अनुसार, महाशिवरात्रि की रात को भगवान शिव ने तांडव नृत्य किया था, जो सृष्टि, संरक्षण और विनाश का प्रतीक है. इस रात को शिव भक्त पूरी रात जागरण करते हैं और शिव के भजन-कीर्तन में लीन रहते हैं. महाशिवरात्रि का पर्व ना केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसे आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम भी माना जाता है. इस दिन ध्यान और साधना करने से व्यक्ति को मन की शांति और आध्यात्मिक बल मिलता है. इस दिन विशेष तौर पर शिव पूजन, रात्रि जागरण, मंत्र जप, व्रत और चार प्रहर की पूजा करने का बड़ा महत्व है. कहा जाता है कि महाशिवरात्रि के दिन की गई भक्ति और उपासना से भक्तों को जीवन में सुख, समृद्धि और सभी प्रकार के लाभ मिलते हैं.
300 साल बाद ऐसा संयोग
काशी के ज्योतिषियों का दावा है कि करीब 300 साल बाद महाशिवरात्रि पर 8 योग का शुभ योग बन रहा है. 15 फरवरी को सूर्य, बुध और शुक्र का त्रिग्रही योग बन रहा है. इसके अलावा इस दिन श्रवण नक्षत्र भी है जो भगवान शिव को अतिप्रिय माना जाता है. इसके अलावा व्यतिपात, वरियान, ध्रुव और राज योग का भी महासंयोग है. जो इस दिन को और भी खास बनाता है.
महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी 2026
द्रिक पंचांग के अनुसार, महाशिवरात्रि की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी 2026 को शाम 5 बजकर 4 मिनट से शुरू होगी और 16 फरवरी को शाम 5 बजकर 34 मिनट पर समाप्त होगी. इसका मतलब यह है कि मुख्य रूप से महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाएगी, लेकिन तिथि रात और अगले दिन तक चलने के कारण पूजा का समय भी ज्यादा रहेगा. पारण का समय 16 फरवरी की सुबह 6 बजकर 33 मिनट से दोपहर 3 बजकर 10 मिनट तक रहेगा.
चार प्रहर की पूजा का मुहूर्त
महाशिवरात्रि पर चार पहर का पूजा मुहूर्त बेहद खास माना जाता है. पहला प्रहर 15 फरवरी की शाम 6 बजकर 11 मिनट से रात 9 बजकर 23 मिनट तक रहेगा. दूसरा प्रहर 15 फरवरी की रात 9 बजकर 23 मिनट से 16 फरवरी की रात 12 बजकर 35 मिनट तक होगा. तीसरा प्रहर 16 फरवरी की रात 12 बजकर 35 मिनट से सुबह 3 बजकर 47 मिनट तक रहेगा और चौथा प्रहर 16 फरवरी को सुबह 3 बजकर 47 मिनट से 6 बजकर 59 मिनट तक रहेगा. वहीं, निशिथ काल का पूजा समय 16 फरवरी की रात 12 बजकर 9 मिनट से लेकर 1 बजकर 1 मिनट तक रहेगा, जिसे सबसे शुभ माना जाता है.
महाशिवरात्रि पूजा विधि
महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक करना और उसके ऊपर केसर मिलाकर जल अर्पित करना विशेष लाभदायक माना गया है. शिवजी को बेलपत्र, भांग, धतूरा, फल, मिठाई आदि अर्पित करना चाहिए. इसके बाद मंत्रों का जप जैसे ‘ॐ नमः शिवाय’ और ‘ॐ नमो भगवते रुद्राय’ करना भी इस दिन का विशेष महत्व है. घी के दीपक से भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें. साथ ही शिव पुराण का पाठ और रात्रि जागरण करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है. भक्त इस दिन रातभर दीप जलाकर रखें और चंदन का तिलक करें.








