छतरपुर: बुंदेलखंड के जाने माने धार्मिक स्थल बागेश्वर धाम पर बाबा बागेश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री दान की पेटी से इस बार 300 गरीब बेटियों के हाथ पीले करने जा रहे हैं. 15 फरवरी महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर ये बेटियां धाम पर सात फेरे लेकर अपने नए जीवन की शुरुआत करेंगी. शुक्रवार को धाम पर हल्दी की रस्म निभाई गई, जिसमें मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव पहुंचे. यहां बाबा बागेश्वर ने मुख्यमंत्री को मंडप के नीचे बैठकर हल्दी लगाई, तो उन्होंने भी बाबा को हल्दी लगाकर रंग दिया. इसके बाद सीएम ने विधि-विधान से मंडप पूजन किया.
सीएम और बाबा ने लगाई शगुन की हल्दी
सिद्ध पीठ बागेश्वर धाम में सातवां कन्या विवाह महोत्सव चल रहा है, जिसमें बाबा बागेश्वर खुद भागवत कथा सुना रहे हैं और आयोजन की तैयारी भी देख रहे हैं. बाबा इस आयोजन में एक पिता की तरह कार्य कर रहे हैं. वहीं कन्या विवाह आयोजन में मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव पहुंचे और मंडप का पूजन किया. इस दौरान धीरेन्द्र शास्त्री ने मोहन यादव के साथ हंसी ठिठोली कर हल्दी में रंग दिया. वहीं सीएम साहब भी पीछे नहीं हटे और उन्होंने भी बाबा बागेश्वर पर हल्दी की ताली उड़ेल दी. इस दौरान मंत्री दिलीप अहिरवार, खजुराहो सांसद वीडी शर्मा, छतरपुर, राजनगर विधायक भी मौजूद रहे.
बागेश्वर धाम पर गुरुकुलम का हुआ शुभारंभ
धाम अभी तक दुनिया में आस्था और धार्मिक स्थल के नाम से जाना जाता था, लेकिन अब सनातन वैदिक गुरुकुल के नाम से जाना जाएगा. वैदिक शिक्षा शास्त्र और शस्त्र की शिक्षा बटुक ब्राह्मणों को यहां मिलेगी. वैदिक ज्ञान प्रदान करने के लिए बागेश्वर धाम पर बनारस के 4 विद्वान आचार्य इस गुरुकुलम में रहेंगे. प्रथम वर्ष में 31 बच्चों को वैदिक कर्मकांड की शिक्षा देंगे. इस दौरान बागेश्वर महाराज के साथ उद्घाटन के समय बद्रीनाथ वाले महाराज, उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार सहित कई संत मौजूद रहे.
'विवाह में खर्चे से बचें, बच्चों की तरक्की में करें खर्च'
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा, "सामूहिक कन्या विवाह महोत्सव से अनावश्यक खर्चों में कटौती होती है. युवाओं की तरक्की में लोग खर्च करें, विवाह में खर्चे से बचें. कन्या विवाह एक यज्ञ के समान है. उन्होंने कहा कि, ''यहां से जिन बेटियों के विवाह हो रहे हैं. सरकार उन जोड़ों को रोजगार देने के प्रयास करेगी." बागेश्वर महाराज ने कहा, "मुख्यमंत्री ऐसे राजनेता है जो राष्ट्र के साथ संत, महंत और धर्म को साथ लेकर चल रहे हैं. गौ मंदिर का काम और मंदिरों के स्थानीय न्यासों पर विशेष ध्यान दे रहे हैं. प्रदेश के मुखिया का सहयोग मिलने से धार्मिक संस्थान और बेहतर ढंग से सनातन के लिए कार्य कर पाते हैं."









