MP News के अनुसार अब दुष्कर्म, POCSO और अन्य गंभीर लैंगिक अपराधों की जांच में ढिलाई भारी पड़ सकती है। पुलिस मुख्यालय ने परिपत्र जारी कर ऐसे मामलों में डीएनए परीक्षण अनिवार्य कर दिया है। उच्च न्यायालय के निर्देशों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया गया है कि यदि विवेचक (IO) डीएनए टेस्ट कराने में लापरवाही बरतते हैं, तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
परिपत्र में कहा गया है कि वैज्ञानिक साक्ष्य के अभाव में अभियोजन कमजोर हो जाता है। इसलिए हर संवेदनशील मामले में डीएनए सैंपलिंग, उसका सुरक्षित संरक्षण और समयबद्ध तरीके से न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) को भेजना अनिवार्य होगा। भविष्य में किसी भी प्रकार की चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
गंभीर मामलों को प्राथमिकता देने के लिए FSL प्रदर्शों की कलर-कोडिंग प्रणाली लागू की गई है। POCSO, हत्या और बलात्कार जैसे जघन्य मामलों में लाल रंग की मार्किंग होगी। जहर की पुष्टि वाले मर्ग मामलों में नारंगी रंग और अन्य पॉजिटिव रिपोर्ट वाले मामलों में पीली पहचान तय की गई है।
इसके अलावा, FSL रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर विवेचक और पर्यवेक्षण अधिकारी को तत्काल अलर्ट जारी किया जाएगा, ताकि केस डायरी में आवश्यक कार्रवाई दर्ज कर समय पर चालान पेश किया जा सके।
साथ ही, लंबित FSL रिपोर्ट और मालखाने में रखे प्रदर्शों की मासिक समीक्षा पुलिस अधीक्षक स्तर पर अनिवार्य की गई है। साफ है कि अब MP News में सामने आए इस फैसले के बाद लैंगिक अपराधों की जांच में वैज्ञानिक प्रमाणों की अनदेखी नहीं चलेगी।









