मुंबई की एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी ने सोम के ₹347 करोड़ के शेयर अटैचमेंट को किया कन्फर्म

0
10

PBPT एक्ट के तहत 2.94 करोड़ प्रमोटर शेयर और 42.5 लाख वारंट लॉक; बेनामी लेयरिंग के आरोप, कुल अटैचमेंट करीब ₹700 करोड़ तक पहुंचा 

 भोपाल /मुंबई। बेनामी प्रॉपर्टी ट्रांजैक्शन (PBPT) एक्ट, 1988 के तहत बड़ी कार्रवाई में मुंबई स्थित एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी ने सोम डिस्टलरी एण्ड ब्रेवरीज प्राइवेट लिमिटेड  (SDBWL) के 2.94 करोड़ प्रमोटर शेयर और 42.5 लाख वारंट के प्रोविजनल अटैचमेंट को कन्फर्म कर दिया है। ये शेयर और वारंट कंपनी के प्रमोटर-डायरेक्टर जगदीश अरोड़ा के पास बताए गए हैं। 18 फरवरी को पारित आदेश में अथॉरिटी ने सेक्शन 26(3) के तहत बेनामी प्रोहिबिशन यूनिट (BPU), भोपाल द्वारा सेक्शन 24(4) में किए गए फाइनल प्रोविजनल अटैचमेंट को सही ठहराया। अटैच किए गए शेयरों और वारंट की कुल बाजार कीमत अटैचमेंट की तारीख तक करीब ₹347 करोड़ आंकी गई है।

 बेनामी लेन-देन का आरोप 

आदेश के मुताबिक, इन शेयरों और वारंट को एक्ट के सेक्शन 2(8) के तहत “बेनामी प्रॉपर्टी से अर्जित आय” माना गया है। जांच में 15 कथित बेनामीदारों के बैंक खातों के जरिए वित्तीय लेयरिंग का जिक्र है, जिन्हें SOM ग्रुप के कर्मचारी और सहयोगी बताया गया है।अथॉरिटी के रिकॉर्ड में कहा गया है कि 2019 से 2023 के बीच SDBWL की बड़ी हिस्सेदारी कथित बेनामीदारों के नाम पर रखी गई और बाद में बेची गई। 

 नोटिस से कन्फर्मेशन तक

अक्टूबर 2024 में सेक्शन 24(1) के तहत कारण बताओ नोटिस जारी हुआ* ।

 इसके साथ सेक्शन 24(3) के तहत प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर पास किया गया। 

 जवाबों पर विचार के बाद फरवरी 2025 में सेक्शन 24(4) के तहत फाइनल प्रोविजनल अटैचमेंट आदेश जारी हुआ। 

 अब सेक्शन 26(3) के तहत उस अटैचमेंट को कन्फर्म कर दिया गया है। 

 BPU, भोपाल डायरेक्टर जनरल ऑफ इनकम टैक्स (इन्वेस्टिगेशन), मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के अधीन कार्य करता है। 

पहले भी हो चुकी है कार्रवाई

यह ताजा कन्फर्मेशन 2025 में पारित उन आदेशों के अतिरिक्त है, जिनमें SOM ग्रुप से जुड़े 10 अन्य कथित बेनामीदारों के शेयरों पर किए गए प्रोविजनल अटैचमेंट को बरकरार रखा गया था। उन मामलों में अटैच शेयरों की कुल बाजार कीमत लगभग ₹350 करोड़ बताई गई थी।

कुल अटैचमेंट ₹700 करोड़ के करीब

मौजूदा आदेश के बाद इस पूरे प्रकरण में अब तक करीब ₹700 करोड़ के शेयर अटैच किए जा चुके हैं। मामले को बेनामी लेन-देन के बड़े कॉर्पोरेट उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है, जिसकी आगे की सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया पर उद्योग जगत की नजरें टिकी हैं।