Chettyencheri Maheswara Temple: केरल में चेट्ट्येनचेरी महेश्वर मंदिर अपने आप में अनोखा है. यहां भगवान शिव की पूजा और उनकी कृपा प्राप्ति का तरीका सबसे अलग है. जहां महादेव को जीवंत शक्ति के रूप में पूजा जाता है और उनका अवतार लेने वाले से आशीर्वाद लिया जाता है. यह परंपरा केरल के मुरिंगेरी में स्थित चेट्ट्येनचेरी महेश्वर मंदिर में सालों से चली आ रही है, जहां हर साल भक्तों को महादेव साक्षात् मनुष्य रूप दर्शन देते हैं.
भगवान शिव को समर्पित है चेट्ट्येनचेरी मंदिर
केरल के कन्नूर जिले में अंचराक्कंडी के पास मुरिंगेरी में स्थित चेट्ट्येनचेरी महेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित है. यहां उनके शांत और शक्तिशाली दोनों रूपों की पूजा की जाती है. मंदिर में नवरात्रि के समय नवरात्रि महोलसवम का आयोजन किया जाता है, जिसमें गणपति होमम और सरस्वती पूजा जैसे अनुष्ठान किए जाते हैं.
सहस्र दीपा समर्पणम परंपरा
मंदिर में सहस्र दीपा समर्पणम (एक हजार दीपक जलाना) जलाने की परंपरा भी सालों से निभाई जा रही है. उत्सव का समापन विजयादशमी पर विद्यारंभम के साथ होता है, जहां बच्चों के पठन-पाठन की शुरुआत की जाती है.
क्या है अप्रैल में होने वाली कालरात्रि थेय्यम परंपरा
माना जाता है कि इस मंदिर में भगवान शिव को नहीं, बल्कि उनके रौद्र और शांत दोनों ऊर्जा को पूजा जाता है. यही कारण है कि यहां अप्रैल के महीने में शक्तिशाली कालरात्रि थेय्यम की परंपरा सालों से निभाई जा रही है.
इस परंपरा में एक अज्ञात व्यक्ति भारी-भरकम मुकुट पहनकर खुद को रंग-बिरंगे-रंगों से रंगता है. भगवान शिव का रूप लेने के लिए व्यक्ति घास और पत्तों का भी इस्तेमाल करता है क्योंकि भगवान शिव अर्द्धनारीश्वर हैं और मां पार्वती प्रकृति का रूप हैं.
मध्यरात्रि में मनुष्य रूप में होता है महादेव का दर्शन
देवता का रूप धारण करके व्यक्ति मध्यरात्रि में दर्शन देता है और क्रोध से भरा नृत्य भी करता है. भक्त थेय्यम में भारी संख्या में जुटते हैं और भगवान शिव का आशीर्वाद लेते हैं.
कुछ लोग थेय्यम में देवता बने मनुष्य के सामने अपनी मनोकामना भी बोलते हैं. उन्हें विश्वास है कि सामने खड़ा इंसान भगवान शिव का ही रूप है और उसके अंदर उन्हीं की ऊर्जा है. यह परंपरा जीवंत रंगों और गहरी भक्ति को प्रदर्शित करती है.









