भारतीय आदिम जाति सेवक संघ (BAJSS), जो देश के जनजातीय समुदायों के उत्थान के लिए समर्पित एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय संस्था है, को २१ मार्च को अपना नया नेतृत्व मिल गया है। श्री प्रकाश कुमार उइके जी को सर्वसम्मति से संघ का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया है। श्री उइके जी इस गौरवशाली पद को संभालने वाले अब तक के सबसे युवा अध्यक्ष बन गए हैं।
न्यायपालिका से समाज सेवा तक का सफर
श्री प्रकाश कुमार उइके का जीवन प्रेरणा की एक मिसाल है। एक पूर्व न्यायाधीश के रूप में न्यायपालिका में अपनी सेवाएं देने के बाद, वे वर्तमान में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) में सलाहकार के रूप में कार्यरत हैं। कानून और नीति निर्माण के अपने गहरे अनुभव के साथ अब वे आदिवासी समाज के अधिकारों के संरक्षण के लिए पूर्णतः समर्पित होंगे।
संस्था का गौरवशाली इतिहास और पूर्व दिग्गज अध्यक्ष
भारतीय आदिम जाति सेवक संघ की स्थापना महात्मा गांधी जी की प्रेरणा से ‘ठक्कर बापा’ द्वारा 1948 में की गई थी। इस संस्था का नेतृत्व समय-समय पर देश की महान विभूतियों ने किया है, जिनमें शामिल हैं:
- डॉ. राजेंद्र प्रसाद: भारत के प्रथम राष्ट्रपति, जो 1948 से 1962 तक इसके पहले अध्यक्ष रहे।
- श्री यू.एन. ढेबर: गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष।
- श्री मोरारजी देसाई: भारत के पूर्व प्रधानमंत्री।
- डॉ. (श्रीमती) फूलरेणु गुहा: पूर्व केंद्रीय समाज कल्याण राज्य मंत्री।
- इनके अतिरिक्त श्री जे.एच. चिंचालकर, श्री बनवारी लाल गौड़ और श्री एन.सी. हेम्ब्रम जैसे समर्पित समाजसेवियों ने भी इस पद की गरिमा बढ़ाई है।
भविष्य की योजनाएं और प्राथमिकताएं
नवनियुक्त अध्यक्ष श्री उइके का कार्यकाल मुख्य रूप से आदिवासी समुदाय के कानूनी और संवैधानिक अधिकारों पर केंद्रित रहेगा। उनकी भविष्य की प्रमुख योजनाओं में शामिल हैं:
- कानूनी सहायता: आदिवासी लोगों को जटिल कानूनी प्रक्रियाओं में सहायता प्रदान करना ताकि उन्हें उचित न्याय मिल सके।
- अधिकारों का क्रियान्वयन: ‘पेसा’ (PESA) अधिनियम और ‘वन अधिकार अधिनियम’ (FRA) जैसे महत्वपूर्ण कानूनों का जमीनी स्तर पर सही और प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करना।
- जनजातीय अधिकार: संबंधित जनजातियों के संवैधानिक अधिकारों और उनके हितों की रक्षा के लिए निरंतर कार्य करना।
अपने कानूनी अनुभव और प्रशासनिक विशेषज्ञता के साथ, श्री उइके का लक्ष्य भारतीय आदिम जाति सेवक संघ के माध्यम से आदिवासी समुदायों का वास्तविक सशक्तिकरण करना है। इस नियुक्ति से देश भर के जनजातीय समुदायों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार हुआ है







