भारत-न्यूजीलैंड FTA साइन, 100% भारतीय निर्यात अब टैक्स-फ्री

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भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुआ यह मुक्त व्यापार समझौता (FTA) न केवल व्यापारिक दृष्टि से ऐतिहासिक है, बल्कि यह प्रधानमंत्री मोदी के 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की ओर एक बड़ा रणनीतिक कदम भी है। 27 अप्रैल, 2026 (सोमवार) को आधिकारिक रूप से संपन्न हुआ यह समझौता वैश्विक व्यापार के मानचित्र पर भारत की बढ़ती साख को दर्शाता है।

इस समझौते के प्रमुख पहलुओं का विश्लेषण यहाँ दिया गया है:


1. भारतीय निर्यातकों के लिए 'गोल्डन अवसर'

इस समझौते की सबसे बड़ी उपलब्धि भारत को मिलने वाली 100% शुल्क-मुक्त पहुंच है।

  • तत्काल लाभ: भारत से न्यूजीलैंड जाने वाले सभी उत्पादों पर अब कोई सीमा शुल्क (Tariff) नहीं लगेगा।

  • प्रमुख क्षेत्र: टेक्सटाइल (कपड़ा), चमड़ा उद्योग, कालीन, वाहन के पुर्जे और चीनी मिट्टी के बर्तनों के निर्यात में भारी उछाल आने की उम्मीद है। अभी तक इन पर लगभग 10% शुल्क लगता था, जो अब शून्य हो जाएगा।

2. घरेलू उद्योग और किसानों की सुरक्षा

भारत ने अपनी आर्थिक कूटनीति में चतुराई दिखाते हुए संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षित रखा है:

  • डेयरी सेक्टर: भारतीय डेयरी उद्योग की चिंताओं को देखते हुए दूध, पनीर, दही और क्रीम जैसे उत्पादों को एफटीए से बाहर रखा गया है। इससे न्यूजीलैंड के सस्ते डेयरी उत्पादों से भारतीय किसानों को खतरा नहीं होगा।

  • कृषि क्षेत्र: स्थानीय कृषि बाजार के हितों की रक्षा के लिए अन्य संवेदनशील खाद्य उत्पादों पर भी आयात छूट नहीं दी गई है।

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4. छात्रों के लिए 'गेम-चेंजर' प्रावधान

न्यूजीलैंड ने पहली बार किसी देश के साथ पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा को लेकर ऐसा अनुबंध किया है:

  • भारतीय छात्रों को अब पढ़ाई के साथ प्रति सप्ताह 20 घंटे काम करने की कानूनी अनुमति होगी।

  • पढ़ाई पूरी होने के बाद मिलने वाले 'वर्क वीजा' की अवधि को बढ़ाया गया है, जिससे छात्रों को वहां करियर बनाने के बेहतर अवसर मिलेंगे।


5. पीयूष गोयल की 'हैट्रिक' और भविष्य की राह

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के नेतृत्व में यह साढ़े तीन वर्षों में 7वां सफल मुक्त व्यापार समझौता है।

  • रिकॉर्ड समय: सामान्यतः ऐसे समझौतों में वर्षों लग जाते हैं, लेकिन इसे मात्र 9 महीनों में पूरा करना दोनों देशों के आपसी विश्वास को दर्शाता है।

  • अगला लक्ष्य: मंत्री ने संकेत दिया है कि अगले कुछ महीनों में यूरोपीय संघ (EU) और अमेरिका के साथ भी महत्वपूर्ण व्यापारिक समझौते हो सकते हैं।