“खून की आखिरी बूंद तक बदला लेंगे” – अमेरिका को ईरान की खुली चेतावनी

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तेहरान/वाशिंगटन। मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में जारी तनाव अब एक ऐसे मुहाने पर पहुँच गया है जहाँ से वापसी की राह कठिन नजर आ रही है। ईरान और अमेरिका के बीच मची सैन्य होड़ ने पूरी दुनिया को युद्ध के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। इस बीच, ईरान ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए अमेरिका को अंतिम चेतावनी जारी की है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की रणनीतिक नाकेबंदी के बीच ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह झुकने के बजाय अपने अस्तित्व और शर्तों के लिए अंतिम सांस तक संघर्ष करने को तैयार है।

वैश्विक ऊर्जा संकट: होर्मुज की नाकेबंदी ने बढ़ाई धड़कनें

दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का लगभग 20 से 30 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है, जो अब दोनों देशों के बीच शक्ति प्रदर्शन का अखाड़ा बन चुका है। ईरान ने जहाँ अमेरिकी और इजरायली जहाजों के लिए इस रास्ते को अवरुद्ध कर दिया है, वहीं अमेरिका ने भी अरब सागर की ओर से कड़ी नाकेबंदी कर रखी है। इस दोहरी घेराबंदी ने वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है। हालांकि कई अंतरराष्ट्रीय शक्तियां मध्यस्थता के जरिए समाधान निकालने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन दोनों ही पक्ष अपनी-अपनी शर्तों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।

कमांडर शहरम ईरानी का पलटवार: 'ईरान को कम समझना दुश्मन का भ्रम'

ईरानी नौसेना के कमांडर शहरम ईरानी ने अमेरिका की युद्ध क्षमताओं और उसकी धारणाओं पर तीखा प्रहार किया है। कमांडर ने कहा कि जो लोग यह मानते हैं कि वे ईरान को कुछ ही दिनों के भीतर घुटने टेकने पर मजबूर कर देंगे, वे एक बड़े भ्रम में जी रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि दुश्मन की यह सोच अब सैन्य अकादमियों में एक मजाक बनकर रह गई है। कमांडर ईरानी के अनुसार, अब तक बरता गया संयम कमजोरी नहीं बल्कि एक सोची-समझी रणनीति थी, लेकिन यदि उनकी जायज मांगें अनसुनी की गईं, तो ईरान अपनी सैन्य रणनीति में ऐसा बदलाव करेगा जिसकी कल्पना भी वाशिंगटन ने नहीं की होगी।

ट्रंप की सख्त नीति और ईरान का आक्रामक पैंतरा

बुधवार को सरकारी ब्रॉडकास्टर के जरिए जारी संदेश में ईरानी नौसैनिक अधिकारियों ने सीधे तौर पर चेतावनी दी है कि अमेरिकी सेना की किसी भी अगली गतिविधि का जवाब तत्काल और विनाशकारी कार्रवाई से दिया जाएगा। उन्होंने साफ किया कि स्थायी समाधान की उम्मीद में अब तक दिखाया गया धैर्य अब समाप्त हो रहा है। दूसरी ओर, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के किसी भी समझौते के प्रस्ताव को सिरे से खारिज करते हुए अपनी नाकेबंदी की नीति को सही ठहराया है। ट्रंप का मानना है कि नौसैनिक घेराबंदी हवाई हमलों से कहीं अधिक प्रभावशाली है और इसने ईरान को आर्थिक रूप से बैकफुट पर धकेल दिया है। इस तनातनी ने पूरे क्षेत्र को बारूद के ढेर पर बैठा दिया है।