खरगोन/महेश्वर: किसान कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज सुबह सबको चौंका दिया। महेश्वर में रात्रि विश्राम के बाद, मुख्यमंत्री का काफिला अचानक खरगोन जिले के कतरगांव उपार्जन केंद्र पहुंचा। यहाँ उन्होंने न केवल सरकारी व्यवस्थाओं का जायजा लिया, बल्कि जमीन पर बैठकर किसानों के साथ चर्चा की और उनके साथ चाय की चुस्कियां भी लीं।
1. औचक निरीक्षण और कलेक्टर को कड़े निर्देश
मुख्यमंत्री ने 29 अप्रैल को महेश्वर में दिए अपने बयान पर अमल करते हुए आज सुबह कतरगांव केंद्र का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने उपार्जन केंद्र पर तौल प्रक्रिया, बारदाने की उपलब्धता और किसानों के लिए की गई सुविधाओं को देखा। मौके पर मौजूद खरगोन कलेक्टर भव्या मित्तल को निर्देश देते हुए सीएम ने कहा कि किसानों को अपनी उपज बेचने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए और भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
2. नियमों में ढील: चमक विहीन गेहूं की खरीद को मंजूरी
किसानों के हित में सरकार ने इस बार गुणवत्ता मानकों में बड़ा बदलाव किया है। अब केंद्रों पर 50 प्रतिशत तक चमक विहीन गेहूं भी खरीदा जा सकेगा। इसके अलावा, सूखे दानों की सीमा को 6% से बढ़ाकर 10% और क्षतिग्रस्त दानों की सीमा 6% तय की गई है। तौल की गति बढ़ाने के लिए हर केंद्र पर कांटों की संख्या बढ़ाकर 6 कर दी गई है, ताकि किसानों को घंटों इंतजार न करना पड़े।
3. 100 लाख मीट्रिक टन का 'विशाल' लक्ष्य
प्रदेश में अब तक करीब 9.83 लाख किसानों ने अपनी फसल बेचने के लिए स्लॉट बुक कराया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अब तक 5.08 लाख किसानों से 22.70 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की जा चुकी है। पिछले वर्ष के 77 लाख मीट्रिक टन के मुकाबले, डॉ. मोहन यादव की सरकार ने इस बार 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदने का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा है, जिसके लिए बुनियादी सुविधाओं (छाया, पानी, इंटरनेट) पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।









