स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में एपल का बड़ा कदम, भारत में बनाएगी ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर

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बेंगलुरु: वैश्विक प्रौद्योगिकी दिग्गज एपल ने भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ी पहल करते हुए 100 करोड़ रुपये के निवेश की महत्वपूर्ण घोषणा की है। कंपनी का यह कदम उसके वैश्विक स्थिरता लक्ष्यों और साल 2030 तक पूरी आपूर्ति शृंखला को कार्बन मुक्त बनाने की दिशा में एक रणनीतिक प्रयास है। इस निवेश के माध्यम से भारत में पर्यावरण संरक्षण और हरित बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की योजना बनाई गई है, जो देश की स्वच्छ ऊर्जा अर्थव्यवस्था में निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी को भी रेखांकित करता है। यह पहल न केवल कार्बन पदचिह्नों को कम करने में सहायक होगी, बल्कि भारत की ग्रीन सप्लाई चेन को भी एक नई दिशा प्रदान करेगी।

क्लीनमैक्स के साथ साझेदारी और ऊर्जा उत्पादन का विस्तार

एपल ने भारत के प्रमुख ऊर्जा डेवलपर 'क्लीनमैक्स' के साथ हाथ मिलाकर देशभर में 150 मेगावाट से अधिक क्षमता के नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने का निर्णय लिया है। इस परियोजना से उत्पादित होने वाली स्वच्छ ऊर्जा की मात्रा इतनी विशाल होगी कि इससे प्रतिवर्ष लगभग डेढ़ लाख भारतीय परिवारों की बिजली संबंधी जरूरतों को आसानी से पूरा किया जा सकेगा। यह पहली बार नहीं है जब दोनों कंपनियों ने साथ काम किया हो, क्योंकि इससे पहले भी एपल ने अपने भारतीय कार्यालयों और रिटेल आउटलेट्स को सौर ऊर्जा से संचालित करने के लिए इसी प्रकार के प्रोजेक्ट्स पर काम किया था। भविष्य में इस उत्पादन क्षमता को और अधिक विस्तार देने की भी योजना है, जिससे औद्योगिक परिचालन में जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को न्यूनतम किया जा सके।

कार्बन तटस्थता का लक्ष्य और पर्यावरण के प्रति वैश्विक प्रतिबद्धता

कंपनी का प्राथमिक उद्देश्य अपनी पूरी विनिर्माण और आपूर्ति शृंखला को 100 प्रतिशत कार्बन न्यूट्रल बनाना है, जिसके लिए भारत एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरा है। एपल की नेतृत्व टीम का मानना है कि पर्यावरण की रक्षा करना केवल एक कॉर्पोरेट जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह नवाचार के लिए एक बड़ी प्रेरक शक्ति भी है। भारत के प्राकृतिक संसाधनों को सहेजने और यहां की स्वच्छ ऊर्जा अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए कंपनी लगातार नए निवेश कर रही है। यह प्रतिबद्धता वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए किए जा रहे प्रयासों का एक अभिन्न हिस्सा है, जो अन्य बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए भी एक उदाहरण पेश करती है।

प्लास्टिक मुक्त भविष्य और हरित उद्यमिता को प्रोत्साहन

ऊर्जा क्षेत्र के अलावा एपल ने भारत में प्लास्टिक प्रदूषण को नियंत्रित करने और पारिस्थितिक तंत्र में सुधार के लिए डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया जैसी संस्थाओं के साथ भी महत्वपूर्ण करार किए हैं। इस सहयोग के जरिए अपशिष्ट प्रबंधन और सामग्रियों के पुनर्चक्रण की प्रणालियों को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा ताकि पर्यावरण में प्लास्टिक के रिसाव को रोका जा सके। साथ ही, कंपनी ने 'एक्यूमेन' के साथ मिलकर नए और छोटे ग्रीन स्टार्टअप्स को मेंटरशिप और वित्तीय सहायता प्रदान करने की योजना बनाई है, जो पुनर्योजी कृषि और सर्कुलर इकॉनमी जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। ये सभी प्रयास सामूहिक रूप से भारत में एक सशक्त और टिकाऊ पर्यावरण अनुकूल व्यापारिक वातावरण तैयार करने में सहायक सिद्ध होंगे।