ईंधन महंगाई को लेकर सियासी घमासान तेज, पेट्रोल-डीजल कीमतों पर आरोप-प्रत्यारोप शुरू

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नई दिल्ली | देश में पेट्रोल और डीजल के दामों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के बीच राजनीतिक खींचतान एक बार फिर चरम पर पहुंच गई है। ईंधन की कीमतों में हो रहे बदलावों को लेकर दोनों प्रमुख दलों के बीच तीखी बयानबाजी का दौर जारी है। इसी सिलसिले में भाजपा नेता गौरव वल्लभ ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी हमेशा की तरह एक ऐसे बेखबर नेता की तरह बात कर रहे हैं, जिनके पास न तो सही आंकड़े हैं और न ही वैश्विक ज्ञान।

वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतों की तुलना

भाजपा नेता गौरव वल्लभ ने अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि दुनिया की दस बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत में ईंधन के दाम बेहद नियंत्रित हैं। उन्होंने बताया कि अमेरिका में पेट्रोल की कीमतों में 44.5%, चीन में 21.7%, जर्मनी में 13.7%, यूके में 19.2% और फ्रांस में 20.9% तक का इजाफा हुआ है। इसके विपरीत, भारत में यह बढ़ोतरी महज 3% रही है, जो दुनिया के औसत से पेट्रोल के मामले में 7 गुना और डीजल के मामले में 8 गुना कम है। उन्होंने राहुल गांधी को सलाह दी कि वे एक जागरूक नागरिक की तरह बात करें और उन्हें गलत आंकड़े देने वाली अपनी रिसर्च टीम को तुरंत पद से हटा दें।

विपक्ष का महंगाई और टैक्स को लेकर सरकार पर हमला

दूसरी तरफ, कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए आरोप लगाया है कि वह ईंधन पर भारी टैक्स वसूल कर आम जनता पर महंगाई का बोझ बढ़ा रही है। विपक्ष का कहना है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने से मालभाड़ा और परिवहन लागत बढ़ जाती है, जिसका सीधा असर रोजमर्रा की खाने-पीने की चीजों पर पड़ता है। कांग्रेस नेताओं ने सोशल मीडिया और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए सरकार को घेरते हुए कहा कि चुनाव के समय सस्ते ईंधन का वादा करने वाली भाजपा अब लगातार दाम बढ़ाकर आम आदमी की जेब काट रही है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर और आर्थिक जानकारों की राय

भाजपा ने पलटवार करते हुए कांग्रेस के इन आरोपों को पूरी तरह राजनीतिक बताया है। सत्तापक्ष का तर्क है कि भारत में ईंधन की दरें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के उतार-चढ़ाव से तय होती हैं, फिर भी केंद्र सरकार ने समय-समय पर एक्साइज ड्यूटी घटाकर जनता को राहत दी है। इस बीच, आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम इसी तरह बढ़ते रहे, तो आने वाले समय में घरेलू बाजार में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है। फिलहाल दोनों ही दल इस संवेदनशील मुद्दे पर एक-दूसरे को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं।