शाजापुर / शुजालपुर: मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले के शुजालपुर स्थित सिविल अस्पताल से चिकित्सा जगत को शर्मसार करने वाली घोर लापरवाही का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ एक प्रसूता (महिला) के सुरक्षित प्रसव के बाद डॉक्टरों और स्टाफ ने कथित तौर पर उसके शरीर के भीतर ही आधा किलो वजनी मेडिकल स्पंज (कपास/पट्टी का टुकड़ा) छोड़ दिया। इस बेहद गंभीर लापरवाही के कारण वह बेकसूर महिला पूरे 34 दिनों तक असहनीय दर्द और पीड़ा से तड़पती रही। पीड़िता ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि प्रसव के बाद जब उसने लगातार हो रहे दर्द की शिकायत अस्पताल में की, तो वहां मौजूद डॉक्टरों ने इसे एक सामान्य प्रक्रिया (नॉर्मल बात) बताकर दवा देकर घर रवाना कर दिया। लेकिन जब दर्द थमा नहीं और आंतरिक संक्रमण (इन्फेक्शन) के चलते शरीर से भीषण बदबू आने लगी, तब जाकर एक निजी अस्पताल में गहन जांच कराई गई, जिसमें गुप्तांग (प्राइवेट पार्ट) के भीतर स्पंज फंसे होने की बात उजागर हुई। हालांकि, समय रहते एक अन्य जटिल ऑपरेशन के जरिए उस स्पंज को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिससे महिला की जान बाल-बाल बच गई।
अस्पताल से छुट्टी के बाद शुरू हुआ दर्द का खौफनाक सिलसिला
यह पूरा मामला शुजालपुर के सरकारी सिविल अस्पताल का है, जहां बीते 7 अप्रैल को महिला को प्रसव के लिए भर्ती कराया गया था। महिला ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया, जिसके बाद डॉक्टरों ने सब कुछ सामान्य पाकर उसे अस्पताल से डिस्चार्ज (छुट्टी) कर दिया। लेकिन घर पहुंचते ही महिला को अपने निजी अंगों में तेज और असहनीय दर्द का अहसास होने लगा। करीब दो हफ़्तों तक इस तकलीफ़ को बर्दाश्त करने और स्थिति में कोई सुधार न होने पर, जब शरीर से अत्यधिक बदबू आने लगी, तो महिला दोबारा सिविल अस्पताल के डॉक्टरों के पास परामर्श के लिए पहुंची। आरोप है कि ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर ने बिना किसी शारीरिक जांच या गंभीरता के इसे प्रसव के बाद होने वाला सामान्य दर्द करार दिया और कुछ मामूली दवाइयां थमाकर उसे वापस भेज दिया।
प्राइवेट अस्पताल की जांच में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
सरकारी अस्पताल की दवाओं का महिला की सेहत पर कोई सकारात्मक असर नहीं हुआ, बल्कि संक्रमण बढ़ने से उसकी स्थिति और अधिक नाजुक हो गई। महिला को लगातार तेज दर्द, बदबू, आंतरिक इन्फेक्शन और पेशाब रुकने जैसी कई गंभीर शारीरिक समस्याओं ने घेर लिया। जब दर्द पूरी तरह से बर्दाश्त के बाहर हो गया और महिला की हालत गंभीर रूप से बिगड़ने लगी, तो बदहवास परिजन उसे आनन-फानन में एक निजी (प्राइवेट) अस्पताल लेकर भागे। वहां के डॉक्टरों ने जब महिला की आंतरिक जांच (स्कैन) की, तो वे भी दंग रह गए; महिला के शरीर के भीतर एक बड़ी बाहरी वस्तु फंसी हुई थी। इसके बाद डॉक्टरों की टीम ने तुरंत आपातकालीन ऑपरेशन की तैयारी की और महिला के प्राइवेट पार्ट से करीब आधा किलो वजनी मेडिकल स्पंज सफलतापूर्वक बाहर निकाला, जो बीती 7 अप्रैल से यानी प्रसव के समय से ही अंदर ही छूटा हुआ था।
लापरवाही पर शिकायत के बाद भी आठ दिनों तक सन्नाटा
पीड़िता के रिश्तेदार मुकेश ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि डॉक्टरों की इस घोर लापरवाही की वजह से मरीज की जान दांव पर लग गई थी और वह मौत के मुंह से वापस आई है। उन्होंने बताया कि इस पूरे वाकये और लापरवाही को लेकर सिविल अस्पताल के प्रबंधन से लिखित शिकायत भी की गई थी, लेकिन शिकायत दर्ज होने के 8 दिन बीत जाने के बाद भी शुरुआत में दोषियों पर कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई, जिससे परिजनों में भारी आक्रोश है।
महिला डॉक्टर समेत 7 नर्सिंग स्टाफ को नोटिस, जांच कमेटी गठित
मामले के तूल पकड़ने और सोशल मीडिया व मीडिया में सुर्खियां बनने के बाद अस्पताल प्रशासन अब जागा है। पूरे मामले पर शुजालपुर सिविल अस्पताल की प्रभारी डॉक्टर शारदा रामसरिया ने आधिकारिक बयान देते हुए स्वीकार किया कि यह मामला बेहद गंभीर और संवेदनशील है। उन्होंने जानकारी दी कि इस लापरवाही के संबंध में दोषी महिला चिकित्सक डॉक्टर आभा जैन सहित डिलीवरी रूम में तैनात रहे 7 नर्सिंग स्टाफ सदस्यों को कारण बताओ नोटिस (शो-कॉज नोटिस) जारी कर लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है। इसके साथ ही पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच के लिए एक विशेष जांच दल (कमेटी) का गठन कर दिया गया है, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ आगे की कड़ी दंडात्मक और वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।









