बालेन शाह सरकार को झटका, ₹100 से ऊपर की खरीदारी पर शुल्क वसूली पर लगी रोक

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सोनबरसा। नेपाल-भारत बॉर्डर से जुड़े आम नागरिकों के लिए एक बहुत ही राहत भरी खबर सामने आई है। नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने सीमा पार से सामान्य नागरिकों द्वारा लाए जाने वाले 100 रुपये से अधिक के रोजमर्रा के सामान पर लगाए गए कस्टम ड्यूटी (सीमा शुल्क) की वसूली पर फिलहाल अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत के इस फैसले से सीमावर्ती तराई-मधेश क्षेत्र के निवासियों और स्थानीय व्यापारियों को बड़ी राहत मिली है।

सुप्रीम कोर्ट का सरकार को सख्त निर्देश

नेपाल सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश हरि प्रसाद फुयाल और न्यायाधीश टेक प्रसाद ढुंगाना की संयुक्त पीठ ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए एक बड़ा आदेश जारी किया है। कोर्ट ने प्रधानमंत्री व मंत्रिपरिषद कार्यालय और वित्त मंत्रालय सहित सभी संबंधित विभागों को यह साफ निर्देश दिया है कि जब तक इस मामले पर कोई अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक आम जनता से दैनिक उपभोग की वस्तुओं पर किसी भी तरह का सीमा शुल्क न वसूला जाए।

विवादित सरकारी अधिसूचना और जनविरोध

गौरतलब है कि नेपाल सरकार ने बीते 2 मई को एक अधिसूचना जारी की थी, जिसके तहत भारत से नेपाल लाए जाने वाले 100 रुपये से अधिक मूल्य के हर सामान पर कस्टम शुल्क चुकाना अनिवार्य कर दिया गया था। सरकार के इस नियम का सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले आम लोगों ने भारी विरोध किया था। स्थानीय नागरिकों का तर्क था कि इस अव्यवहारिक नियम की वजह से उनकी रोजमर्रा की जरूरी चीजों की आवाजाही पूरी तरह प्रभावित हो रही थी। इस सरकारी फैसले के खिलाफ अधिवक्ताओं ने 14 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दायर कर इसे चुनौती दी थी, जिसे गंभीर मानते हुए अदालत ने अब अंतरिम राहत दी है।

दोनों देशों के सीमावर्ती बाजारों में खुशी की लहर

अदालत के इस फैसले के बाद भारत और नेपाल, दोनों ही तरफ के सीमावर्ती क्षेत्रों में खुशी का माहौल है। सोनबरसा सहित भारतीय सीमा के बाजारों के कारोबारियों ने इस फैसले का पुरजोर स्वागत किया है। स्थानीय व्यापारियों का मानना है कि इस रोक के बाद अब सीमावर्ती बाजारों में रौनक फिर से लौट आएगी और नेपाल के नागरिक पहले की तरह ही बिना किसी परेशानी के अपनी जरूरत का सामान आसानी से खरीद सकेंगे।