ICU में मां के पास बेटे की मौत, कुर्सी पर बैठे-बैठे आया साइलेंट अटैक

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सिरोही (शिवगंज)। जिला अस्पताल से एक बेहद दर्दनाक और भावुक कर देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ आईसीयू (ICU) वार्ड के बाहर अपनी माँ के ठीक होने का इंतज़ार कर रहे एक 36 वर्षीय व्यक्ति की दिल का दौरा पड़ने से अचानक मौत हो गई। इस दुखद हादसे ने जहाँ पीड़ित परिवार को झकझोर कर रख दिया है, वहीं संकट की इस घड़ी में एक एम्बुलेंस चालक द्वारा दिखाई गई मानवता की चर्चा हर तरफ हो रही है।

आईसीयू के बाहर बैठे-बैठे आया साइलेंट अटैक

प्राप्त जानकारी के अनुसार, शिवगंज के केसरपुरा की रहने वाली 74 वर्षीय लादी देवी को सांस लेने में तकलीफ होने के कारण सोमवार को सिरोही जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया था। उनका बड़ा बेटा गोपाल (36 वर्ष) माँ की तीमारदारी के लिए अस्पताल में ही रुका हुआ था। देर रात करीब ढाई बजे आईसीयू वार्ड के बाहर कुर्सी पर बैठे-बैठे गोपाल के सीने में अचानक तेज दर्द उठा और वह बेसुध होकर फर्श पर गिर पड़ा। अस्पताल स्टाफ और डॉक्टरों ने उसे तुरंत चिकित्सा उपलब्ध कराई, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

दस्तावेजों से हुई शिनाख्त, छोटे भाई पर टूटा दुखों का पहाड़

अचानक हुई इस अनहोनी के वक्त मृतक गोपाल के पास उसका कोई पहचान पत्र मौजूद नहीं था। इसके बाद पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए उसकी बीमार माँ के पास रखे दस्तावेजों के जरिए गोपाल की पहचान की और घर पर मौजूद उसके छोटे भाई को इस दुखद घटना की जानकारी दी। आधी रात को भाई की मौत और माँ की गंभीर बीमारी की खबर सुनते ही पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

आर्थिक तंगी बनी बाधा, तो देवदूत बनकर आगे आया एम्बुलेंस चालक

गोपाल की असमय मौत के बाद गरीब परिवार के सामने एक नई मुसीबत खड़ी हो गई। आर्थिक तंगी के कारण छोटा भाई गोपाल के पार्थिव शरीर को वापस अपने गाँव केसरपुरा ले जाने का खर्च उठाने में पूरी तरह असमर्थ था। अस्पताल परिसर में परिवार की यह बेबसी और लाचारी देखकर वहाँ मौजूद एम्बुलेंस चालक आशु सिंह का दिल पसीज गया। आशु सिंह ने संकट के इस समय में बिना एक भी रुपया लिए शव को नि:शुल्क उनके पैतृक गाँव तक पहुँचाया।

गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार, इंसानियत आज भी जिंदा

एम्बुलेंस चालक की इस नि:स्वार्थ मदद के बाद गोपाल का पार्थिव शरीर गाँव पहुँचा, जहाँ बेहद गमगीन माहौल में उसका अंतिम संस्कार किया गया। एक तरफ जहाँ यह घटना हमें जीवन की अनिश्चितता और 'साइलेंट हार्ट अटैक' के बढ़ते खतरों से रूबरू कराती है, वहीं दूसरी तरफ एम्बुलेंस चालक आशु सिंह जैसे लोग समाज में यह भरोसा जगाते हैं कि कठिन से कठिन समय में भी इंसानियत आज भी जिंदा है।