केरल में ‘वंदे मातरम’ पर सियासी बवाल, वीडी सतीशन के शपथ ग्रहण से बढ़ा विवाद

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तिरुवनंतपुरम। केरल में नए मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन के शपथ ग्रहण समारोह में 'वंदे मातरम' का पूरा संस्करण गाए जाने को लेकर एक बड़ा राजनीतिक विवाद छिड़ गया है। इस कदम पर वामपंथी दलों (वामदलों) ने कड़ी आपत्ति जताई है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने वामदलों के इस रुख पर तीखा पलटवार किया है। इस विवाद ने राज्य के राजनीतिक माहौल को पूरी तरह गरमा दिया है और राष्ट्रगीत के गायन को लेकर बहस तेज हो गई है।

वामदलों ने क्यों जताई आपत्ति?

सीपीएम (CPM) और सीपीआई (CPI) जैसे वामपंथी दलों ने आधिकारिक समारोह में पूरा 'वंदे मातरम' गाए जाने को भारत के बहु-सांस्कृतिक और विविध समाज के सिद्धांतों के खिलाफ बताया है। सीपीएम का कहना है कि 1937 में कांग्रेस कार्यसमिति और 1950 में संविधान सभा में हुई चर्चाओं के अनुसार, 'वंदे मातरम' की केवल पहली आठ पंक्तियों को ही आधिकारिक राष्ट्रगीत के रूप में स्वीकार किया गया था। पार्टी के मुताबिक, इस गीत के कुछ हिस्से विशिष्ट धार्मिक मान्यताओं को दर्शाते हैं, जिन्हें आधिकारिक उपयोग से बाहर रखा गया था। वामदलों का तर्क है कि भाजपा-शासित राज्यों में भी शपथ ग्रहण के दौरान पूरा गीत नहीं गाया जाता है। सीपीआई के नेता बिनॉय विश्वम ने भी इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि कुछ पंक्तियां महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू के धर्मनिरपेक्ष भारत के दृष्टिकोण के अनुकूल नहीं थीं, इसलिए उन्हें हटाया गया था।

कांग्रेस और राजभवन का रुख

इस पूरे विवाद पर सफाई देते हुए केरल के नए मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता वी.डी. सतीशन ने स्पष्ट किया है कि सरकार को इस बात की पहले से कोई जानकारी नहीं थी कि समारोह में पूरा 'वंदे मातरम' गाया जाएगा। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम की जिम्मेदारी से खुद को अलग करते हुए साफ शब्दों में कहा कि यह निर्णय पूरी तरह से राजभवन (राज्यपाल कार्यालय) का था।

भाजपा का तीखा पलटवार

दूसरी तरफ, भाजपा ने 'वंदे मातरम' का विरोध करने पर वामदलों की कड़ी निंदा की है। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि वामपंथी दल राष्ट्रीय गीत का अपमान कर रहे हैं और जमात-ए-इस्लामी तथा एसडीपीआई (SDPI) जैसी ताकतों को खुश करने के लिए 'तुष्टीकरण की राजनीति' का सहारा ले रहे हैं। केरल भाजपा के वरिष्ठ नेता राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि वामदल भारतीय परंपराओं से दूर भाग रहे हैं और चुनाव में जनता द्वारा नकारे जाने की बौखलाहट में इस तरह के बेबुनियाद विवाद खड़े कर रहे हैं।

तमिलनाडु में भी हो चुका है ऐसा विवाद

'वंदे मातरम' के गायन और समारोह के नियमों को लेकर ऐसा ही एक विवाद पहले तमिलनाडु में भी देखने को मिला था। वहां मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान तय परंपरा को बदलने पर सीपीआई ने आपत्ति जताई थी। नियम के अनुसार, कार्यक्रम की शुरुआत तमिल राज्य गान 'तमिल ताई वाल्थु' से होनी चाहिए थी और अंत राष्ट्रगान से होना था। लेकिन राजभवन के निर्देशों पर 'वंदे मातरम' को पहले और तमिल गान को तीसरे स्थान पर रख दिया गया था, जिसे वामदलों ने स्थापित नियमों और परंपराओं का उल्लंघन बताया था।