आधुनिक कामकाजी संस्कृति और सोशल लाइफस्टाइल के बीच इन दिनों चाय के साथ सिगरेट पीने का चलन तेजी से पैर पसार रहा है। विशेषकर नौकरीपेशा युवाओं के बीच दफ्तरों में काम के दौरान छोटा सा ब्रेक लेकर इस तरह का सेवन करना एक आम आदत बन चुका है। कई लोग इसे मानसिक तनाव और काम के बोझ को कम करने का जरिया मानते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह घातक कॉम्बिनेशन धीरे-धीरे शरीर को अंदर से खोखला कर रहा है।
चिकित्सकों के मुताबिक, चाय और सिगरेट का एक साथ सेवन मानव शरीर के विभिन्न महत्वपूर्ण अंगों पर बेहद प्रतिकूल प्रभाव डालता है। शुरुआत में शौक या फैशन के तौर पर अपनाई जाने वाली यह आदत कब एक गंभीर लत में बदल जाती है, व्यक्ति को पता ही नहीं चलता।
शरीर के मुख्य तंत्रों पर होने वाले गंभीर दुष्प्रभाव:
कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम (दिल) पर अत्यधिक दबाव:
सिगरेट के भीतर मौजूद निकोटिन तत्व रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ता है, जिससे हृदय की गति (हार्ट रेट) और रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) अचानक बढ़ जाता है। वहीं दूसरी ओर, चाय में पाया जाने वाला कैफीन भी शरीर को उत्तेजित करने का काम करता है। जब ये दोनों तत्व एक साथ शरीर में प्रवेश करते हैं, तो हृदय पर दोगुना दबाव पड़ता है। लंबे समय तक ऐसा होने से उच्च रक्तचाप (हाई बीपी) और दिल के दौरे (हार्ट अटैक) का जोखिम काफी ज्यादा बढ़ जाता है।
श्वसन प्रणाली (फेफड़ों) की कार्यक्षमता में कमी:
सिगरेट से निकलने वाला जहरीला धुआं सीधे तौर पर फेफड़ों को भारी नुकसान पहुंचाता है। इससे सांस की नलियों में संक्रमण, सूजन और फेफड़ों की ऑक्सीजन सोखने की प्राकृतिक क्षमता घटने लगती है। यद्यपि चाय फेफड़ों को नुकसान नहीं पहुंचाती, परंतु चाय की चुस्की के साथ सिगरेट पीने की आदत के कारण व्यक्ति लंबे समय तक धुएं के संपर्क में रहता है, जिससे नुकसान की तीव्रता बढ़ जाती है।
मस्तिष्क में गहराता नशे का चक्र:
निकोटिन और कैफीन का मिश्रण सीधे केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (सेंट्रल नर्वस सिस्टम) पर असर डालता है और मस्तिष्क में 'डोपामिन' (खुशी का अहसास कराने वाला न्यूरोट्रांसमीटर) के स्राव को कृत्रिम रूप से प्रभावित करता है। इससे दिमाग के भीतर एक ऐसा पैटर्न सेट हो जाता है कि चाय के बिना सिगरेट या सिगरेट के बिना चाय अधूरी लगने लगती है। यही मानसिक निर्भरता आगे चलकर एक लाइलाज लत का रूप ले लेती है।
पाचन क्रिया और पेट की परतों को नुकसान:
अक्सर देखा जाता है कि लोग सुबह खाली पेट या दोपहर में बिना कुछ खाए सीधे चाय-सिगरेट का सेवन करते हैं। यह प्रक्रिया पेट में अत्यधिक मात्रा में हाइड्रोक्लोरिक एसिड का निर्माण करती है। परिणामस्वरूप गंभीर एसिडिटी, गैस, खट्टी डकारें और पेट में लगातार जलन रहने लगती है। लंबे समय तक यह सिलसिला चलने से आमाशय की आंतरिक परत (गैस्ट्रिक मिकोसा) कमजोर हो जाती है, जिससे अल्सर का खतरा रहता है।
अस्थायी राहत के बाद बढ़ता मानसिक तनाव:
युवाओं को भले ही लगता हो कि चाय-सुट्टा उनके तनाव को दूर करता है, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार यह राहत बेहद क्षणिक और अस्थायी होती है। जैसे ही शरीर से निकोटिन और कैफीन का असर कम होने लगता है, वैसे ही व्यक्ति के भीतर बेचैनी, अत्यधिक चिड़चिड़ापन, एकाग्रता में कमी और मूड स्विंग्स की समस्या बढ़ने लगती है।









