कानपुर | शहर के कृष्णा हॉस्पिटल में डॉक्टरों की कथित लापरवाही के कारण एक महिला का हाथ काटने के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के जवान विकास सिंह ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) पर अस्पताल के डॉक्टरों को संरक्षण देने और उनके पक्ष में अस्पष्ट जांच रिपोर्ट तैयार करने का गंभीर आरोप लगाया है। सीएमओ की इस टालमटोल वाली रिपोर्ट से नाराज होकर आईटीबीपी के करीब 100 जवान सुबह 11:15 बजे 15 से अधिक गाड़ियों और ट्रकों के काफिले के साथ पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचे और परिसर का घेराव किया।जवानों के आक्रोश को देखते हुए पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल और अपर पुलिस आयुक्त (कानून व्यवस्था) डॉ. विपिन कुमार ताडा ने पीड़ित जवान से मुलाकात की। उच्चाधिकारियों से वार्ता के बाद आईटीबीपी की 5-6 गाड़ियां सच जानने और विरोध दर्ज कराने के लिए सीएमओ कार्यालय की ओर रवाना हुईं।
गलत इलाज से फैला संक्रमण, मां का काटना पड़ा हाथ
पीड़ित आईटीबीपी जवान विकास सिंह के अनुसार, उन्होंने अपनी मां निर्मला देवी को 13 मई की शाम सांस लेने में तकलीफ होने पर कृष्णा हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। इलाज के दौरान अगले ही दिन (14 मई) उनकी मां के दाहिने हाथ में अत्यधिक सूजन आ गई। जब डॉक्टरों से इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने इसे सामान्य बताते हुए कहा कि सूजन धीरे-धीरे खुद ही ठीक हो जाएगी। हालांकि, साथी जवानों की सलाह पर विकास सिंह ने अपनी मां को उसी शाम पारस हॉस्पिटल में स्थानांतरित (शिफ्ट) करवा दिया। वहां के डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि हाथ में गंभीर संक्रमण (इन्फेक्शन) फैल चुका है, जिसके कारण मरीज की जान बचाने के लिए 17 मई को उनका हाथ काटना पड़ा।
इंसाफ के लिए काटा हुआ हाथ लेकर कमिश्नरेट पहुंचे जवान
लापरवाही के इस गंभीर मामले में पीड़ित जवान ने न्याय के लिए दो दिनों तक रेलबाजार थाने और एसीपी कार्यालय के चक्कर काटे, लेकिन जब पुलिस प्रशासन की तरफ से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे अपनी मां का कटा हुआ हाथ लेकर सीधे पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गए। इस संवेदनशील स्थिति को देखते हुए पुलिस कमिश्नर ने मामले की गंभीरता को समझा और सीएमओ कानपुर को तत्काल पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश जारी किए थे।
सीएमओ की रिपोर्ट पर पुलिस कमिश्नर ने जताई आपत्ति
शुक्रवार को सीएमओ कार्यालय द्वारा जो जांच रिपोर्ट पुलिस को सौंपी गई, वह पूरी तरह से 'संभावनाओं और कयासों' पर आधारित थी, जिसमें किसी भी डॉक्टर की सीधी जवाबदेही तय नहीं की गई थी। इस ढीली रिपोर्ट पर खुद पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को स्पष्ट आदेश देते हुए कहा कि रिपोर्ट संभावनाओं पर नहीं बल्कि पुख्ता तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए, जिसमें स्पष्ट रूप से दोष निर्धारित किया गया हो ताकि दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की संस्तुति की जा सके। इसी रिपोर्ट में घालमेल का आरोप लगाकर शनिवार को आईटीबीपी के जवानों ने पुलिस कमिश्नर दफ्तर का रुख किया









