जयपुर। सीमावर्ती गांवों का विकास, वहां रहने वाले लोगों का आत्मविश्वास और मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता देश की वास्तविक सामरिक शक्ति का आधार है। यही कारण है कि डबल इंजन सरकार की प्रतिबद्धता और संवेदनशील दृष्टिकोण के चलते वर्षों तक विकास की मुख्यधारा से दूर रहे सीमावर्ती गांव अब आधुनिक सुविधाओं और सशक्त आधारभूत ढांचे से जुड़ने लगे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शी सोच और ’सीमावर्ती गांव देश के अंतिम नहीं, बल्कि प्रथम गांव हैं’ की भावना को साकार करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास की नई तस्वीर गढ़ने जा रही है।
वाईब्रेंट विलेज प्रोग्राम-।। के माध्यम से सीमावर्ती क्षेत्रों को सुविधाओं के साथ-साथ आत्मनिर्भरता, सुरक्षा और समृद्धि की नई पहचान देने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा स्वयं योजना की निरंतर मॉनिटरिंग करते हुए अधिकारियों को समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दे रहे हैं, ताकि सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों को विकास का वास्तविक लाभ मिल सके।
सड़कों का बिछेगा जाल,स्वास्थ्य, शिक्षा से लेकर संपर्क जैसी कई सुविधाओं का होगा विस्तार–
वाईब्रेन्ट विलेज प्रोग्राम-।। के तहत राजस्थान के 5 सीमावर्ती जिलों के 184 रणनीतिक गांवों में सड़क संपर्क, स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, टेलीविजन, दूरसंचार कनेक्टिविटी, आजीविका सृजन, पर्यटन, संस्कृति, जागरूकता गतिविधियों को प्रोत्साहन, युवा सशक्तीकरण एवं कौशल विकास, वित्तीय समावेशन, सहकारिता, स्वयं सहायता समूहों, किसान उत्पाद संगठनों का विकास एवं परिसंपत्तियों के रखरखाव सहित ग्राम अवसंरचना से जुड़े व्यापक विकास कार्य किए जाएंगे। इन प्रयासों से सीमावर्ती क्षेत्रों में जीवन स्तर बेहतर तो होगा ही, साथ ही रोजगार, पर्यटन, स्थानीय आजीविका और सामाजिक सशक्तीकरण के नए अवसर भी विकसित होंगे।
प्रदेश के श्रीगंगानगर के 68, बीकानेर के 46, बाड़मेर के 36, जैसलमेर के 30 और फलौदी जिले के 4 गांवों को कार्यक्रम के तहत रणनीतिक गांवों के रूप में चयनित किया गया है। वर्तमान में वाईब्रेंट विलेज प्रोग्राम-।। के अंतर्गत चयनित कुल 184 में से 123 गांवों में 232 करोड़ से अधिक की लागत के 515 कार्य करवाये जाने प्रस्तावित हैं।
कार्यक्रम के अनुसार राज्य के रणनीतिक गांवों में विकास एवं योजनाओं की संतृप्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रतिवर्ष 3 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वहीं, राजस्थान के सीमा ब्लॉकों के 3 हजार 195 गांवों में सभी मौसम में 4 थीमेटिक क्षेत्रों की संतृप्ति के तहत सड़क संपर्क, दूरसंचार कनेक्टिविटी, टेलीविजन कनेक्टिविटी के साथ-साथ ऑन ग्रिड विद्युतीकरण किया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के निकट रहने वाले समुदायों के साथ जुड़ाव बढ़ाने, विश्वास स्थापित करने एवं सकारात्मक संबंध विकसित करने के लिए विशेष प्रयास किये जा रहे हैं। जिसके तहत सांस्कृतिक कार्यक्रमों, सामुदायिक बैठकों, पर्यटन गतिविधियों, प्रशिक्षण सत्रों तथा जागरूकता अभियानों के आयोजन के साथ ही सोशल मीडिया के माध्यम से संवेदनशील एवं भावनात्मक जुड़ाव और अधिक मजबूत किया जा रहा है।
कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए केन्द्रीय, राज्य एवं जिला स्तर पर समितियों के माध्यम से समन्वय तंत्र विकसित किया गया है। ग्राम प्रोफाइल वेरिफिकेशन एवं अपडेशन, गैप आकलन-मूल्यांकन, ग्राम कार्य योजना के माध्यम से ग्राम अवसंरचना सुधार एवं सामुदायिक सहभागिता के लिए स्पष्ट उद्देश्य एवं कार्य निर्धारण किये गए हैं। इतना ही नहीं, गांवों के सत्यापन से लेकर प्रस्ताव तक की संपूर्ण प्रक्रिया वाईब्रेन्ट विलेज पोर्टल पर ही संपादित की जाएगी। यही कारण है कि कार्यक्रम के तहत अब तक 10 क्षेत्रों में संतृप्ति के लिए चयनित राजस्थान के समस्त 184 रणनीतिक गांवों का सत्यापन एवं प्रोफाइल अपडेशन किया जा चुका है। वहीं, 4 थीमेटिक क्षेत्रों में संतृप्ति हेतु सीमा ब्लॉक के कुल 3 हजार 195 गांवों में से 3 हजार अधिक गांवों का सत्यापन एवं 2 हजार 558 गांवों का प्रोफाइल अपडेशन किया जा चुका है।
मुख्यमंत्री थार सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम से बदल रही सीमावर्ती गांवों की तस्वीर-
अंतर्राष्ट्रीय सीमा क्षेत्र की विशिष्ट आवश्यकताओं को मद्देनजर रखते हुए राज्य सरकार बजट घोषणा की अनुपालना में मुख्यमंत्री थार सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम प्रारम्भ किया गया है। इस योजना के तहत 5 सीमावर्ती जिलों के 1 हजार 206 गांवों के समग्र विकास के लिए प्रतिवर्ष 150 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वर्ष 2025-26 में योजना के तहत बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थय, कृषि, पशुपालन, खेल, पर्यटन, आधारभूत संरचना विकास से जुड़े 137 करोड़ रुपये की लागत के 1 हजार से अधिक कार्यों को स्वीकृति दी गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार द्वारा सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास को राष्ट्रीय प्राथमिकता दिए जाने और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के प्रभावी नेतृत्व में राज्य सरकार की सक्रिय कार्यशैली के चलते राजस्थान के सीमावर्ती गांव अब विकास, सुरक्षा और आत्मविश्वास के नए मॉडल के रूप में उभर रहे हैं। यह कार्यक्रम निर्माण कार्यों से इतर सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों के जीवन में विश्वास, सुविधाओं और समृद्धि का नया संचार करने का एक व्यापक अभियान साबित होगा।









