ट्रंप फैक्टर का असर? QUAD की एकजुटता पर उठने लगे सवाल

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नई दिल्ली: नई दिल्ली में क्वाड (Quad) देशों के विदेश मंत्रियों की एक बेहद अहम बैठक हुई है। इस बैठक के बीच जापानी रणनीतिक विशेषज्ञों ने अमेरिका की बदलती नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में 'इंडो-पैसिफिक क्षेत्र' (हिंद-प्रशांत क्षेत्र) पर अमेरिका का ध्यान कम हुआ है। इसकी वजह से भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया का यह मजबूत संगठन 'क्वाड' अब कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है।

दो साल बाद हुई बैठक, क्यों हुई देरी?

क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की यह बैठक करीब दो साल के लंबे अंतराल के बाद आयोजित हुई है। जानकारों के मुताबिक, इस देरी की मुख्य वजह ट्रंप प्रशासन की नीतियां और चीन के प्रति उनका बदलता रुख है। जापानी विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका अब एशिया-पैसिफिक क्षेत्र को छोड़कर पश्चिमी देशों और मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) पर ज्यादा ध्यान दे रहा है।

मिडिल ईस्ट संकट से बढ़ी एशिया की चिंता

इस साल फरवरी में ईरान के खिलाफ शुरू हुए अमेरिकी सैन्य अभियान के बाद, अमेरिका ने अपने कई युद्धपोत और सैन्य संसाधन इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से हटाकर मिडिल ईस्ट में तैनात कर दिए हैं। अमेरिका के इस कदम से एशिया में उसके सहयोगी देश (जैसे जापान और ऑस्ट्रेलिया) काफी चिंतित हैं। उन्हें डर है कि अगर एशिया में कोई बड़ा संकट आया, तो क्या अमेरिका पहले की तरह उनकी सुरक्षा की गारंटी ले पाएगा?

चीन के साथ ट्रंप की बढ़ती नजदीकियां

इसी बीच, राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन के साथ रिश्ते सुधारने के लिए कदम बढ़ाए हैं। व्यापार समझौतों और बातचीत के जरिए वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच नजदीकियां बढ़ रही हैं। इसने क्वाड के भविष्य पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है, क्योंकि क्वाड संगठन को बनाने का मुख्य मकसद ही इस पूरे क्षेत्र में चीन के बढ़ते दबदबे को रोकना था।

जापान इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल अफेयर्स की वरिष्ठ विश्लेषक उमी अरिगा ने तो यहाँ तक कह दिया कि क्वाड अब सिर्फ "नुकसान कम करने की कोशिश" जैसा मंच बनकर रह गया है। उन्होंने याद दिलाया कि साल 2025 में क्वाड का कोई बड़ा शिखर सम्मेलन नहीं हुआ और ट्रंप ने कभी इसकी बैठकों में खास दिलचस्पी नहीं दिखाई।

क्या कमजोर पड़ रही है राजनीतिक इच्छाशक्ति?

विशेषज्ञों का कहना है कि क्वाड ने वैक्सीन बांटने, नई टेक्नोलॉजी, सप्लाई चेन और समुद्री सुरक्षा जैसे कामों में अच्छी पहल की है, लेकिन चीन को टक्कर देने के लिए जिस मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति की जरूरत थी, वह फिलहाल गायब दिख रही है। ऐसे में अब यह बहस तेज हो गई है कि क्या बदलती दुनिया में क्वाड अपना असली मकसद पूरा कर पाएगा।