पटना | बिहार विधान परिषद की खाली हो रही सीटों को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हैं। राज्य में कुल 10 सीटों पर चुनावी बिसात बिछने जा रही है, जिनमें से 9 सीटें नियमित रूप से खाली हो रही हैं, जबकि 1 सीट मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के कारण रिक्त हुई है, जिस पर उपचुनाव होना है। विधानसभा के मौजूदा गणित के अनुसार, इस बार पासा पलट चुका है। विपक्ष यानी महागठबंधन के खाते में इस बार केवल 1 सीट ही आती दिख रही है, जबकि सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के पाले में 9 सीटें जाने का अनुमान है। एनडीए में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार और उपेंद्र कुशवाहा के सुपुत्र दीपक प्रकाश का उच्च सदन जाना लगभग तय माना जा रहा है, जिसके बाद शेष बची 7 सीटों के लिए दावेदारों की कशमकश बढ़ गई है।
तेज प्रताप यादव की उम्मीदवारी और तेजस्वी के सामने 'वादे' की चुनौती
इस बार के समीकरणों में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस दोनों को परिषद में अपनी एक-एक सीट का नुकसान उठाना पड़ रहा है। राजद के हिस्से आ रही इकलौती सीट पर लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को भेजने की सुगबुगाहट तेज है। हाल ही में नोएडा में पारिवारिक कार्यक्रम के दौरान लालू परिवार की एकजुटता ने इन चर्चाओं को और बल दिया है, जहाँ सूत्रों के मुताबिक लालू प्रसाद खुद तेज प्रताप के नाम के पक्ष में हैं, जबकि तेजस्वी यादव दलगत समीकरणों को तरजीह देना चाहते हैं। तेजस्वी के सामने बड़ी दुविधा यह भी है कि राज्यसभा चुनाव के वक्त ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने विधान परिषद की एक सीट के आश्वासन पर ही महागठबंधन का समर्थन किया था। इसके अलावा लालू परिवार के बेहद करीबी और निवर्तमान सदस्य सुनील कुमार सिंह की दावेदारी को नजरअंदाज करना भी आसान नहीं होगा।
एनडीए में जातीय समीकरणों को साधने की कवायद और सहयोगियों की मांग
एनडीए के खेमे में सीटों के बंटवारे और उम्मीदवारों के चयन में जातीय संतुलन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) की तरफ से कुर्मी समाज से निशांत कुमार, कोईरी समाज से राजीव कुमार सिंह, अति पिछड़ा वर्ग से ललन मंडल और अल्पसंख्यक कोटे से गुलाम रसूल बलियावी के नामों पर सबसे गंभीर मंथन चल रहा है। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (BJP) में कायस्थ समाज से संजय मयूख, राजपूत वर्ग से अमृता भूषण, कुर्मी समाज से प्रेम रंजन पटेल और वैश्य समाज से सिद्धार्थ शंभू तथा अमरनाथ गामी जैसे चेहरे रेस में आगे हैं। इस बीच, गठबंधन के सहयोगी दल भी अपनी दावेदारी ठोक रहे हैं। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान अपने भतीजे सीमांत मृणाल को उच्च सदन भेजने के इच्छुक बताए जा रहे हैं, तो वहीं हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के संरक्षक जीतन राम मांझी भी अपने कोटे से एक सीट की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
जून के पहले हफ्ते में अधिसूचना और 18 जून को होगा फैसला
निर्वाचन आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, बिहार विधान परिषद के इस चुनावी दंगल की औपचारिक शुरुआत 1 जून को अधिसूचना जारी होने के साथ हो जाएगी। प्रत्याशी 8 जून तक अपने नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे, जिनकी स्क्रूटनी (जांच) 9 जून को की जाएगी। नाम वापस लेने की अंतिम तिथि 11 जून मुकर्रर की गई है। इसके बाद सभी सीटों के लिए 18 जून को सुबह से मतदान होगा और इसी दिन शाम तक मतगणना पूरी कर परिणामों की घोषणा भी कर दी जाएगी। वर्तमान में जिन प्रमुख सदस्यों का कार्यकाल 28 जून को समाप्त हो रहा है, उनमें जदयू के गुलाम गौस, भीष्म सहनी, कुमुद वर्मा और श्रीभगवान सिंह कुशवाहा के साथ-साथ भाजपा के संजय मयूख शामिल हैं। वहीं महागठबंधन से राजद के मो. फारूक व सुनील कुमार सिंह और कांग्रेस के डॉ. समीर कुमार सिंह का कार्यकाल भी इसी तिथि को खत्म हो रहा है।








