बिलासपुर: छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा चलाए जा रहे लोक कल्याणकारी शिविरों के दौरान राज्य के अलग-अलग हिस्सों से विवाद और भ्रष्टाचार के बड़े मामले सामने आए हैं। पहला मामला बिलासपुर संभाग के बिल्हा क्षेत्र के ग्राम गोड़ी का है, जहाँ पंचायत स्तर पर आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में कांग्रेस नेता राजेंद्र शुक्ला और क्षेत्रीय विधायक धरमलाल कौशिक के बीच तीखी बहस हो गई। देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच जमकर हंगामा शुरू हो गया, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस शिविर में स्थानीय किसानों ने बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा उठाते हुए क्षेत्र में खस्ताहाल सड़कों, नालियों, बिजली कटौती और खाद की किल्लत की समस्याओं को जनप्रतिनिधियों के सामने खुलकर रखा था।
दुर्ग में जनपद सीईओ और भाजपा नेता के बीच तकरार
प्रशासनिक शिविरों में मचे बवाल की दूसरी तस्वीर दुर्ग जिले से सामने आई है। यहाँ आयोजित एक शिविर के दौरान स्थानीय विधायक की मौजूदगी में ही थनौद जनपद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) रूपेश पांडे और भाजपा नेता पुराण देशमुख के बीच जोरदार झड़प हो गई। विवाद की वजह एक सामुदायिक भवन के निर्माण के लिए स्वीकृत की गई राशि की सही जानकारी न मिलना बताया जा रहा है। जब भाजपा नेता ने इस संबंध में सवाल किया तो अधिकारी उन पर भड़क गए और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करने लगे। मौके पर मौजूद भाजपा समर्थकों ने अधिकारी के इस अड़ियल रवैये और उंगली दिखाकर बात करने के तरीके का कड़ा विरोध किया।
कोरबा शिविर में सेवानिवृत्त शिक्षक से रिश्वत लेता बाबू रंगेहाथ दबोचा
एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की बड़ी कार्रवाई भ्रष्टाचार का एक बेहद गंभीर मामला कोरबा में आयोजित समस्या निवारण शिविर में देखने को मिला। यहाँ एक रिटायर्ड शिक्षक अमृतलाल बघेल अपनी जीपीएफ (GPF) पासबुक की पेंडिंग एंट्री करवाने की आस में शिविर पहुंचे थे। आरोप है कि वहाँ तैनात सहायक ग्रेड-2 के क्लर्क प्रदीप मिश्रा ने इस सीधे से काम के बदले बुजुर्ग शिक्षक से 40 हजार रुपये की घूस मांग ली। परेशान होकर पीड़ित ने इसकी शिकायत बिलासपुर एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) से कर दी। भ्रष्टाचार निरोधक दस्ते ने जाल बिछाया और शिविर परिसर में ही आरोपी बाबू को 40 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया।
इन घटनाओं के बाद सरकारी दावों और जमीनी हकीकत को लेकर प्रशासनिक गलियारों में नई बहस छिड़ गई है।









