जयपुर। राजस्थान के शहरों को स्वच्छ, आधुनिक एवं वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन आधारित मॉडल के रूप में विकसित करने की दिशा में राज्य सरकार लगातार कार्य कर रही है। इसी क्रम में मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास ने मंगलवार को स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 की समीक्षा बैठक सचिवालय में ली और सम्बंधित अधिकारियों को स्वच्छता गतिविधियों में नागरिक सहभागिता को और मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मिशन सुव्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ रहा है, इसकी पहुंच व्यापक है और अब इसे जनआंदोलन के रूप में और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता है।
मुख्य सचिव ने कहा कि मिशन के अंतर्गत राज्य में सतत स्वच्छता, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, उपयोग किए गए जल के प्रबंधन, जनजागरूकता गतिविधियों एवं क्षमता निर्माण जैसे विभिन्न घटकों पर कार्य किया जा रहा है। मिशन के तहत मेटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ), प्रोसेसिंग प्लांट, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, बायो-रिमेडिएशन, डोर-टू-डोर जागरूकता अभियान, नुक्कड़ नाटक, कार्यशालाओं एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से शहरी स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।
मुख्य सचिव ने स्वच्छ सर्वेक्षण की तैयारियों एवं जयपुर में संचालित 1000 टीपीडी क्षमता के वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शहरों में आधुनिक एवं वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली को प्रभावी रूप से लागू किया जाए तथा विभिन्न शहरी निकाय एक-दूसरे की श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों एवं नवाचारों को साझा करें। उन्होंने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्रों में तकनीकी एकरूपता सुनिश्चित करने तथा नियमित कार्यशालाएं आयोजित करने पर भी जोर दिया।
मुख्य सचिव ने अमृत 2.0 परियोजनाओं में तेजी लाने के निर्देश देते हुए कहा कि शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े कार्यों का प्रभाव सीधे आमजन के जीवन से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि शहरी निकाय स्थानीय स्तर पर नवाचार आधारित मॉडल विकसित करें तथा नागरिकों को स्वच्छता गतिविधियों से सक्रिय रूप से जोड़ें। उन्होंने राज्य में संचालित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, लीगेसी वेस्ट रिमेडिएशन, वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजनाओं, निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट प्रबंधन तथा उपयोग किए गए जल के प्रबंधन कार्यों की प्रगति की समीक्षा की।
स्वायत्त शासन विभाग के शासन सचिव श्री रवि जैन ने बताया कि राज्य में स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के अंतर्गत 4804.94 करोड़ रुपए की परियोजनाएं स्वीकृत हैं। वर्तमान में 27 ठोस अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्र संचालित हैं, अनेक परियोजनाएं निर्माणाधीन एवं निविदा प्रक्रिया में हैं। राज्य में अब तक 97.43 लाख घनमीटर लीगेसी वेस्ट का वैज्ञानिक निस्तारण किया जा चुका है तथा लगभग 729.79 एकड़ भूमि पुनः उपयोग योग्य बनाई गई है। जयपुर में संचालित वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट के माध्यम से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण किया जा रहा है। वहीं, जोधपुर में भी वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजना पर कार्य प्रगतिरत है। बैठक में सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त राजस्थान अभियान, डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, सफाई सेवा मैराथन तथा जनभागीदारी आधारित विभिन्न स्वच्छता गतिविधियों की जानकारी भी प्रस्तुत की गई।
बैठक में निदेशक स्वायत्त शासन विभाग श्री जुइकर प्रतीक चंद्रशेखर, मुख्य अभियंता स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) श्री अरुण व्यास , अधीक्षण अभियंता स्वच्छ भारत मिशन (शहरी), अधिशाषी अभियंता स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।









