जयपुर | राजस्थान सरकार ने आबकारी महकमे में एक ऐतिहासिक सुधार करते हुए पूरे प्रदेश में एकीकृत ‘आबकारी प्रवर्तन एवं निरोधक बल’ के निर्माण को हरी झंडी दे दी है। वित्त (आबकारी) विभाग द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आदेशों के तहत विभाग के प्रशासनिक ढांचे में बड़े स्तर पर बदलाव किए जा रहे हैं, जिससे पुराने ढर्रे को बदलकर एक नया और मजबूत सिस्टम तैयार किया जा सके।
अवैध कारोबार पर लगाम के लिए प्रशासनिक ढांचे का पुनर्गठन
इस नई प्रशासनिक व्यवस्था के लागू होने से वर्तमान में काम कर रहे जिला आबकारी अधिकारी, निरोधक शाखा के दफ्तरों और वृत्त निरीक्षक कार्यालयों का पूरी तरह पुनर्गठन किया जाएगा। सरकार का मुख्य मकसद आबकारी कानूनों को सख्ती से लागू करना और राज्य में होने वाली अवैध शराब के निर्माण, तस्करी व बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगाना है। सरकार का मानना है कि इस कदम से विभाग का प्रवर्तन तंत्र पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और चुस्त-दुरुस्त हो जाएगा।
आठ जोन और सैकड़ों नए कार्यालयों का ब्लूप्रिंट तैयार
घोषित की गई नई व्यवस्था के अंतर्गत पूरे राजस्थान को आठ अलग-अलग जोन में बांटा जाएगा, जहां अतिरिक्त आयुक्त स्तर के बड़े अधिकारी कमान संभालेंगे। इस पूरे तंत्र को सुचारू रूप से चलाने के लिए इनके नीचे तिरेपन उपआयुक्त व आबकारी अधिकारी कार्यालय और दो सौ छियासी कनिष्ठ आबकारी अधिकारी कार्यालय काम करेंगे। इसके अलावा, गैर-कानूनी शराब की तस्करी को रोकने के लिए जयपुर और उदयपुर में राज्य स्तरीय उपआयुक्त (प्रवर्तन) कार्यालय खोले जा रहे हैं, जबकि कानूनी अड़चनों से निपटने के लिए जयपुर और जोधपुर में अलग से उपआयुक्त (विधि) कार्यालय स्थापित होंगे।
बजट घोषणा के तहत राजस्व बढ़ाने और अंकुश लगाने की तैयारी
राज्य सरकार ने यह अहम फैसला अपनी पिछली बजट घोषणा को अमलीजामा पहनाने के उद्देश्य से लिया है। प्रशासनिक जानकारों के मुताबिक, आबकारी विभाग के इतिहास में बीते कई दशकों का यह सबसे बड़ा ढांचागत बदलाव है। इस व्यापक फेरबदल से न केवल अलग-अलग स्तर के अधिकारियों और कर्मचारियों के पदों का सही संयोजन हो सकेगा, बल्कि सरकारी खजाने के लिए राजस्व संग्रह में बढ़ोतरी होने के साथ-साथ माफियाओं के अवैध कारोबार पर भी पूरी तरह शिकंजा कसा जा सकेगा।









