टीम इंडिया चयन पर विवाद, कोच ने पूछा- आखिर आकिब नबी को पूरा मौका क्यों नहीं?

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आईपीएल 2026 के रोमांचक समापन के बाद अब भारतीय क्रिकेट टीम का ध्यान रेड-बॉल क्रिकेट की तरफ केंद्रित हो गया है। भारत और अफगानिस्तान के बीच आगामी 6 जून (शनिवार) से एकमात्र ऐतिहासिक टेस्ट मैच खेला जाना है, जिसकी मेजबानी मुल्लांपुर का नया स्टेडियम करेगा। इस मुकाबले के लिए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने अपनी मुख्य टीम की घोषणा कर दी है, जिसमें डोमेस्टिक क्रिकेट में तहलका मचाने वाले जम्मू-कश्मीर के तेज गेंदबाज आकिब नबी को बतौर 'बैकअप बॉलर' (नेट बॉलर) टीम के साथ जोड़ा गया है। हालांकि, चयनकर्ताओं का यह फैसला सीनियर भारतीय तेज गेंदबाज ईशांत शर्मा के बचपन के कोच श्रवण कुमार को नागवार गुजरा है। उनका मानना है कि इस युवा खिलाड़ी को सीधे अंतिम एकादश (Playing-11) का हिस्सा बनाया जाना चाहिए था।

रणजी ट्रॉफी में 60 विकेट चटकाकर रचा था इतिहास

आकिब नबी के समर्थन में उतरे दिल्ली के दिग्गज कोच श्रवण कुमार का साफ कहना है कि नबी को सिर्फ एक नेट बॉलर या बैकअप खिलाड़ी के रूप में टीम के साथ रखकर उनके हुनर को सीमित किया जा रहा है। गौरतलब है कि आकिब नबी ने रणजी ट्रॉफी के हालिया सत्र में अपनी धारदार गेंदबाजी के दम पर कुल 60 विकेट चटकाए थे। उनके इस ऐतिहासिक और चमत्कारी प्रदर्शन की बदौलत ही जम्मू-कश्मीर की टीम ने पहली बार रणजी ट्रॉफी का प्रतिष्ठित खिताब जीतकर इतिहास रचा था।

चयन नीति पर कोच श्रवण कुमार का तीखा प्रहार

चयनकर्ताओं के इस फैसले पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कोच श्रवण कुमार ने मीडिया से बातचीत में कहा:

"जिस तेज गेंदबाज ने घरेलू सत्र में अकेले दम पर अपनी टीम को रणजी चैंपियन बनाया और 60 विकेट झटके, उसे अफगानिस्तान के खिलाफ इकलौते टेस्ट मैच के लिए मुख्य टीम में क्यों शामिल नहीं किया गया? यह 'बैकअप बॉलर' का नया ढोंग क्या है? आप आकिब नबी को बैकअप के नाम पर केवल नेट बॉलर बनाकर रख रहे हैं। यह एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के परफॉर्मर के साथ सही बर्ताव नहीं है, इसे देखकर मुझे सचमुच गहरा धक्का लगा है।"

बीसीसीआई को दी रणजी ट्रॉफी बंद करने की सलाह

अनुभवी कोच ने राष्ट्रीय चयन समिति (Selection Committee) की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि ऐसा लगता है जैसे टेस्ट टीम का चयन करते समय अब रणजी ट्रॉफी के प्रदर्शन को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा:

  • पहचान की कमी: "अगर रणजी ट्रॉफी के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन को राष्ट्रीय टीम में जगह नहीं मिलेगी, तो खिलाड़ियों की इतनी कड़ी मेहनत का क्या मोल रह जाएगा? यह केवल एक ही टेस्ट मैच की तो बात है, तो फिर उस युवा को आजमाने में क्या हर्ज था?"

  • भेदभाव का आरोप: "जिस खिलाड़ी के नाम 60 विकेट हैं वह मुख्य टीम से बाहर है, जबकि घरेलू सत्र में उससे काफी कम विकेट लेने वाले अन्य गेंदबाजों के नाम पर विचार कर उन्हें सीधे टीम में एंट्री दी जा रही है। यह व्यवस्था पूरी तरह अनुचित है।"

  • सख्त रुख: "अगर प्रदर्शन का कोई महत्व ही नहीं है, तो बीसीसीआई को रणजी ट्रॉफी का आयोजन ही बंद कर देना चाहिए। आकिब नबी किसी से टीम में जगह की भीख नहीं मांग रहे हैं, उन्होंने अपनी काबिलियत के दम पर यह मुकाम हासिल किया है। 60 विकेट लेना कोई आसान काम या मजाक नहीं होता।"

इस हाई-वोल्टेज बयानबाजी के बाद नई दिल्ली, श्रीनगर और मुंबई के क्रिकेट गलियारों में बीसीसीआई की चयन नीति को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। अब देखना होगा कि शनिवार से मुल्लांपुर में शुरू हो रहे इस टेस्ट मैच के दौरान टीम इंडिया का प्रबंधन आकिब नबी को लेकर क्या रुख अपनाता है।