जमशेदपुर | विश्व पर्यावरण दिवस के पावन अवसर पर वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के जमशेदपुर वन प्रमंडल द्वारा 5 जून को शहर में एक अनूठी पहल करते हुए ‘ग्रीनाथॉन- वॉक फॉर एनवायरमेंट’ (पर्यावरण पदयात्रा) का शानदार आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम का मुख्य ध्येय आम जनता के बीच प्रकृति के प्रति लगाव पैदा करना, पर्यावरण का संरक्षण करना और पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना था। सोनारी स्थित वन भवन परिसर से शुरू हुई इस मुहिम में वन विभाग के आला अधिकारियों सहित विभिन्न स्कूलों के छात्र-छात्राओं, सामाजिक संस्थाओं और प्रकृति प्रेमियों ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया।
अधिक से अधिक पौधारोपण और सिंगल यूज़ प्लास्टिक को ना कहने का संदेश
इस पदयात्रा के दौरान आरसीसीएफ स्मिता पंकज ने आम जनमानस से संवाद करते हुए धरती को हरा-भरा बनाने के लिए अधिक से अधिक पौधे लगाने की अपील की। उन्होंने दैनिक जीवन में प्लास्टिक का उपयोग पूरी तरह बंद करने और अपने आस-पास के परिवेश को साफ-सुथरा रखने पर विशेष जोर दिया। यह मार्च इस बात का प्रतीक था कि पर्यावरण को बचाना किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जवाबदेही है। हर साल 5 जून को मनाया जाने वाला यह दिवस वैश्विक स्तर पर पर्यावरणीय चुनौतियों से लड़ने का संकल्प दिलाता है और जमशेदपुर में हुई इस ग्रीनाथॉन ने स्थानीय स्तर पर इसी चेतना को जगाने का काम किया है।
नुक्कड़ नाटक और पोस्टर मेकिंग के जरिए बदली लोगों की सोच
पर्यावरण के प्रति लोगों के व्यवहार और नजरिए में सकारात्मक बदलाव लाने के उद्देश्य से इस आयोजन में कई अन्य रचनात्मक गतिविधियां भी जोड़ी गईं। वन भवन परिसर में कलाकारों द्वारा आकर्षक नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किए गए, साथ ही बच्चों के लिए पोस्टर प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया, जहां कला के माध्यम से प्रदूषण के खतरों को दर्शाया गया। इसके साथ ही पर्यावरण विशेषज्ञों ने उपस्थित लोगों को दैनिक जीवन में कार्बन फुटप्रिंट कम करने के व्यावहारिक तरीके भी समझाए।
वनीकरण और जल संरक्षण के लिए निरंतर प्रयास जारी
झारखंड सरकार और वन विभाग राज्य में हरियाली का दायरा बढ़ाने, गिरते भूजल स्तर को सुधारने के लिए जल संरक्षण करने और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए लगातार दूरगामी नीतियां लागू कर रहे हैं। जमशेदपुर वन प्रमंडल द्वारा आयोजित की गई यह ग्रीनाथॉन भी इसी बड़ी पर्यावरण सुधार श्रृंखला का एक अहम हिस्सा है। वन विभाग को पूरी उम्मीद है कि इस तरह के आयोजनों से शहर के निवासियों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना और मजबूत होगी और वे भविष्य में भी प्रकृति को बचाने की हर मुहिम में सक्रिय भागीदार की भूमिका निभाएंगे।









