डुमना नेचर पार्क में पर्यावरण को लेकर बड़ा आयोजन

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जबलपुर: संस्कारधानी जबलपुर के विशाल 'अर्बन फॉरेस्ट' (नगरीय वन क्षेत्र) के विकास, संवर्धन और उसे वैश्विक पहचान दिलाने को लेकर प्रशासनिक और नागरिक स्तर पर हलचलें बेहद तेज हो गई हैं। देश के इस सबसे बड़े नगरीय वन क्षेत्र को राष्ट्रीय पटल पर उसका वास्तविक गौरव और रैंकिंग दिलाने के उद्देश्य से 'नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच' द्वारा एक विस्तृत ब्लूप्रिंट (कार्ययोजना) जारी की गई है।

इस गंभीर और दूरगामी विषय पर त्वरित संज्ञान लेते हुए जबलपुर के महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू ने डुमना नेचर पार्क में जल्द ही एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ परिचर्चा (National Seminar) आयोजित करने का लिखित निर्णय लिया है। इस महामंथन में देश भर के ख्यातिलब्ध पर्यावरण वैज्ञानिक, वन विशेषज्ञ, सामाजिक संगठन और आला प्रशासनिक अधिकारी सम्मिलित होकर इस हरित क्षेत्र के संरक्षण की ठोस रणनीति तैयार करेंगे। इस रणनीतिक बैठक में नगर निगम अध्यक्ष रिंकू बिज भी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे और उन्होंने विकास कार्यों को धरातल पर उतारने की बात कही। इस बीच, पर्यावरण मामलों के जानकार डॉ. पी. जी. नाजपांडे ने राष्ट्रीय रैंकिंग मापदंडों में जबलपुर के इस अद्वितीय अर्बन फॉरेस्ट को शामिल नहीं किए जाने पर गहरी चिंता और आपत्ति प्रकट की है।

3000 एकड़ का विशाल साम्राज्य: राष्ट्रीय पहचान न मिलना प्रशासनिक चूक

जबलपुर की सीमा के भीतर करीब 3000 एकड़ के विशाल भू-भाग पर फैला यह अर्बन फॉरेस्ट देश के किसी भी महानगरीय क्षेत्र में क्षेत्रफल के लिहाज से पहले स्थान पर आता है।

  • बड़ी विसंगति: इतनी अपार प्राकृतिक संपदा और समृद्ध जैव विविधता (Biodiversity) होने के बावजूद केंद्र सरकार की राष्ट्रीय मूल्यांकन रिपोर्टों में इसका कोई उल्लेख न होना एक बड़ी प्रशासनिक लापरवाही मानी जा रही है।

  • मंच की मांग: नागरिक मंच के पदाधिकारियों ने पुरजोर मांग की है कि आगामी समय में इस विसंगति को दूर कर इसे राष्ट्रीय पर्यटन और पर्यावरण मानचित्र पर मजबूती से स्थापित किया जाए। नगर निगम प्रशासन ने भी इस दिशा में व्यापक प्रचार-प्रसार करने और वन क्षेत्र के मूल प्राकृतिक स्वरूप से छेड़छाड़ किए बिना जनभागीदारी बढ़ाने पर अपनी पूर्ण सहमति दी है।

भेड़ाघाट में औद्योगिक सहयोग की अनूठी मिसाल: 20 एकड़ में नया हरित क्षेत्र तैयार

पर्यावरण संवर्धन के इसी महाअभियान के तहत जबलपुर के विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल भेड़ाघाट क्षेत्र में लगभग 20 एकड़ भूमि पर एक और नए 'अर्बन फॉरेस्ट' का निर्माण कार्य पूरी सफलता के साथ संपन्न कर लिया गया है।

कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR): इस नवनिर्मित वन क्षेत्र को पूरी तरह विकसित करने और इसके आगामी रख-रखाव की संपूर्ण जिम्मेदारी नर्मदा जिलेटिन फैक्ट्री ने अपने सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत स्वीकार की है, जो औद्योगिक क्षेत्रों के लिए एक नजीर है।

विश्व पर्यावरण दिवस पर महा-पौधारोपण अभियान (Event Highlights)

विश्व पर्यावरण दिवस के पावन अवसर पर इस नवविकसित वन क्षेत्र में एक वृहद पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया:

प्रमुख विंग और पर्यावरणविदमुख्य योगदान व गतिविधिप्रशासनिक रुख
डॉ. पी. जी. नाजपांडेफलदार और छायादार पौधों का रोपणराष्ट्रीय स्तर पर लॉबिंग की आवश्यकता पर बल
मृगेन्द्र सिंह परिहारसघन वन (Miyawaki Method) की वकालतस्थानीय युवाओं को जोड़ने की अपील
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PCB)पर्यावरण मापदंडों का निरीक्षणऔद्योगिक सहभागिता को अनुकरणीय उदाहरण बताया

इस कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस औद्योगिक सहभागिता की भूरि-भूरि प्रशंसा की। अधिकारियों का कहना है कि उद्योगों और प्रकृति के बीच का यह तालमेल जबलपुर को देश का सबसे हरा-भरा शहर बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।