INDIA ब्लॉक की बैठक पर सबकी नजर, एकता को झटका देने वाला कौन?

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नई दिल्ली:केंद्र की एनडीए सरकार के खिलाफ विपक्षी एकजुटता को धार देने के लिए आज यानी 8 जून 2026 (सोमवार) को 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन की एक बेहद महत्वपूर्ण और बहुप्रतीक्षित बैठक होने जा रही है। हालिया चुनाव नतीजों और बदले हुए राजनीतिक समीकरणों के बीच हो रही इस बैठक का स्वरूप पिछली मुलाकातों से काफी अलग नजर आने की उम्मीद है।


कहां और किस समय होगी यह बैठक?

यह बैठक देश की राजधानी नई दिल्ली के ऐतिहासिक कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में आयोजित की जा रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश के अनुसार, विपक्षी दलों के इस जमावड़े को 'इंडिया जनबंधन' बैठक का नाम दिया गया है, जो दोपहर 12 बजे से शुरू होगी।


कौन-कौन से दल और नेता होंगे शामिल?

भले ही हाल के दिनों में विपक्षी खेमे में कुछ मतभेद उभरे हैं, लेकिन कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि बैठक को लेकर 23 राजनीतिक दलों ने अपनी भागीदारी की पुष्टि कर दी है।

  • प्रमुख दल: तृणमूल कांग्रेस (TMC), समाजवादी पार्टी (SP), शिवसेना (UBT), झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM), नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC), माकपा (CPI-M), राजद (RJD), पीडीपी (PDP), भाकपा (CPI), और तमिलगा वेत्री कझगम (TVK)।

  • अन्य सहयोगी दल: भाकपा-माले, आरएसपी (RSP), वीसीके (VCK), एमडीएमके (MDMK), ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक और असम जातीय परिषद जैसी पार्टियां भी इसमें शामिल हो रही हैं।

  • जुटने वाले दिग्गज नेता: इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी, उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी, सपा प्रमुख अखिलेश यादव, शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, लेफ्ट नेता जॉन ब्रिटास और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती समेत विपक्ष के कई बड़े चेहरे एक मंच पर दिखाई देंगे।


किन दलों ने बनाई दूरी और क्या है कारण?

इस बार विपक्षी एकजुटता के दावों के बीच कुछ बड़े झटके भी लगे हैं, जहां दो प्रमुख दलों ने इस बैठक से दूरी बना ली है:

  1. द्रविड़ मुनेत्र कझगम (DMK): हाल ही में संपन्न हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के बाद पैदा हुए विवाद के कारण डीएमके ने आधिकारिक तौर पर इस बैठक का बहिष्कार किया है। दरअसल, चुनाव के बाद कांग्रेस ने अभिनेता विजय की नई पार्टी 'तमिलगा वेत्री कझगम' (TVK) को सरकार बनाने के लिए समर्थन दे दिया था। डीएमके ने इसे अपने दशकों पुराने गठबंधन के साथ धोखा और पीठ में छुरा घोंपना बताया है। पार्टी का कहना है कि उनके कार्यकर्ताओं की भावनाएं आहत हुई हैं, इसलिए वे ऐसी किसी बैठक में नहीं जाएंगे जहां कांग्रेस मौजूद हो।

  2. आम आदमी पार्टी (AAP): अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी ने भी इस बैठक से दूरी बनाने का फैसला किया है और वे इसमें शामिल नहीं हो रहे हैं।


बैठक में किन मुख्य मुद्दों पर होगी चर्चा?

गठबंधन के नेताओं के अनुसार, इस बैठक का मुख्य उद्देश्य देश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थिति और जन-विरोधी नीतियों के खिलाफ साझा रणनीति तैयार करना है।

बैठक में केंद्र सरकार द्वारा लाए जा रहे परिसीमन बिल (Delimitation Bill) को रोकने के लिए रणनीति बनाने पर विशेष चर्चा हो सकती है, क्योंकि इस संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी। इसके अलावा, आगामी संसद के मानसून सत्र की रूपरेखा, विपक्षी नेताओं के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग, छात्रों से जुड़े मुद्दों और देश में लोकतांत्रिक अधिकारों के कथित हनन जैसे विषयों पर मंथन किया जाएगा। टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी आगामी 2029 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी के खिलाफ 'एक सीट पर एक उम्मीदवार' उतारने का फॉर्मूला भी रख सकती हैं।


पिछली बैठकें और उनके प्रमुख एजेंडे

'इंडिया' गठबंधन की शुरुआत से लेकर अब तक कई महत्वपूर्ण बैठकें हो चुकी हैं, जिनमें गठबंधन के ढांचे और साझा एजेंडे को आकार दिया गया था:

  • पहली बैठक (पटना): विपक्षी एकजुटता की नींव रखने के लिए पहली आधिकारिक बैठक बिहार के पटना में आयोजित की गई थी, जिसमें सभी दलों ने एक साथ मिलकर चुनाव लड़ने पर सहमति जताई थी।

  • दूसरी बैठक (बेंगलुरु): कर्नाटक के बेंगलुरु में हुई इस बैठक में ही विपक्षी मोर्चे को आधिकारिक रूप से 'INDIA' (Indian National Developmental Inclusive Alliance) नाम दिया गया था।

  • तीसरी बैठक (मुंबई): महाराष्ट्र के मुंबई में हुई तीसरी बैठक में गठबंधन के साझा लोगो (Logo), समन्वय समिति (Coordination Committee) के गठन और सीट-शेयरिंग के फॉर्मूले पर विस्तार से चर्चा की गई थी।

  • चौथी व अन्य बैठकें (नई दिल्ली): दिल्ली में हुई बैठकों के दौरान गठबंधन के साझा घोषणापत्र, न्यूनतम साझा कार्यक्रम (CMP) और देशव्यापी संयुक्त रैलियों के आयोजन को लेकर रूपरेखा तैयार की गई थी, ताकि केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जनता के बीच एक मजबूत संदेश भेजा जा सके।