दिल्ली में पोस्टर वार, राहुल गांधी और कांग्रेस निशाने पर

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नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में विपक्षी दलों के साझा मंच 'इंडिया गठबंधन' की एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ी बैठक होने जा रही है। लगभग दो साल के लंबे अंतराल के बाद आयोजित हो रही इस बैठक को लेकर देश का सियासी पारा पूरी तरह चढ़ गया है। इस महा-मंथन से ठीक पहले दिल्ली की सड़कों पर एक बड़ा 'पोस्टर वार' भी देखने को मिल रहा है, जिसमें राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी की नीतियों की तीखी आलोचना की गई है। इस बैठक में विपक्षी नेताओं के सामने कई बड़ी और गंभीर चुनौतियां हैं, जिनमें केंद्र सरकार के खिलाफ एक मजबूत और साझा रणनीति तैयार करना तथा हालिया विधानसभा चुनावों में मिली हार के बाद बिखरती हुई विपक्षी एकजुटता को फिर से समेटना शामिल है।

महा-बैठक में 23 विपक्षी दलों के जुटने की उम्मीद

राजनीतिक गलियारों से आ रही जानकारियों के मुताबिक, इस अहम बैठक में देश के कोने-कोने से विपक्षी कुनबे को मजबूत करने के लिए कुल 23 राजनीतिक दलों के शामिल होने की पूरी संभावना है। बैठक में हिस्सा लेने वाले प्रमुख दलों में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा), राष्ट्रीय जनता दल (राजद), तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इन कद्दावर पार्टियों के अलावा गठबंधन के अन्य घटक दल भी अपने शीर्ष नेतृत्व के साथ इस रणनीतिक चर्चा का हिस्सा बनने के लिए दिल्ली पहुंच रहे हैं।

इन प्रमुख क्षेत्रीय पार्टियों की रहेगी मौजूदगी

गठबंधन को मजबूती देने के लिए इस बैठक में उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना (यूबीटी), शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी, सीपीएम, सीपीआई, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) और जम्मू-कश्मीर से नेशनल कॉन्फ्रेंस तथा पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) जैसी क्षेत्रीय ताकतें भी एक मंच पर नजर आएंगी। इनके साथ ही फॉरवर्ड ब्लॉक, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल), भाकपा माले, एमडीएमके और वीसीके जैसी पार्टियां भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगी।

छोटे और प्रादेशिक दलों का भी मिलेगा साथ

राष्ट्रीय राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत करने के इरादे से इस महा-मंथन में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी), विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी), केरल कांग्रेस, केरल कांग्रेस (मणि), भारत आदिवासी पार्टी (बाप) और लोकदल जैसी छोटी लेकिन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पार्टियां भी शामिल होने जा रही हैं। हालिया चुनाव परिणामों के बाद विपक्षी खेमे में चल रही आपसी खींचतान और बयानों के दौर के बीच, इस बैठक को विपक्षी गठबंधन के भविष्य और साल 2029 के आम चुनाव की जमीन तैयार करने के लिहाज से बेहद निर्णायक माना जा रहा है।