कुत्ता घुमाने के विवाद ने लिया तूल, बीजेपी नेताओं के गुटों में जमकर हंगामा

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इंदौर। मध्य प्रदेश की व्यापारिक नगरी इंदौर के उषा नगर इलाके में रविवार को उस समय भारी अफरा-तफरी मच गई, जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के स्थानीय नेता वीरेंद्र शेडगे के आवास और दफ्तर पर कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा अचानक पथराव कर दिया गया। इस सुनियोजित हमले में उनके कार्यालय की खिड़कियों के कांच पूरी तरह चकनाचूर हो गए। इसके कुछ ही घंटों बाद रविवार शाम को घटना से जुड़ा एक और सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि हमलावर बेहद आक्रामक होकर उनके घर की तरफ ताबड़तोड़ पत्थर बरसा रहे हैं। इस अचानक हुई हिंसक घटना के बाद से पूरे रिहायशी इलाके में दहशत और सुरक्षा को लेकर तनाव का माहौल बना हुआ है।

पालतू श्वान को टहलाने और गंदगी फैलाने पर छिड़ा था विवाद

स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस पूरे फसाद की पटकथा शनिवार की रात को ही लिखी जा चुकी थी, जिसकी शुरुआत एक बेहद मामूली बात से हुई थी। बताया जा रहा है कि शनिवार देर रात को एक व्यक्ति आवासीय परिसर के बाहर अपने पालतू श्वान (डॉग) को घुमा रहा था। इसी दौरान वहां श्वान द्वारा गंदगी फैलाए जाने की बात को लेकर भाजपा नेता वीरेंद्र शेडगे और श्वान मालिक के बीच तीखी कहासुनी हो गई। देखते ही देखते यह मामूली बहस एक बड़े विवाद में तब्दील हो गई। वहीं, घटना के दूसरे पक्ष ने शेडगे और उनके समर्थकों पर आरोप मढ़ा है कि बहसबाजी के दौरान उन लोगों के साथ लात-घूसों से बेरहमी से मारपीट भी की गई थी, जिसने बाद में हिंसक पथराव का रूप ले लिया।

पूर्व विधायक के करीबी के घर हमला और हत्या के प्रयास का केस दर्ज

यह पूरा हाईप्रोफाइल मामला इंदौर के विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-4 का है। पीड़ित वीरेंद्र शेडगे इस क्षेत्र की वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व विधायक मालिनी गौड़ के बेहद करीबी और निजी सहायक (पीए) के रूप में काम करते हैं। दिलचस्प बात यह है कि तनाव के इसी माहौल के बीच इलाके में मौजूद एक अन्य भाजपा नेता के मकान को भी निशाना बनाया गया, जहां अज्ञात हमलावरों ने जमकर पत्थरबाजी की और परिसर में खड़ी उनकी कार को भी काफी नुकसान पहुंचाया। इस दोहरे हमले के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पीड़ित पक्ष (चेतन पाटिल के मित्र) की शिकायत के आधार पर वीरेंद्र शेडगे, गिरीश शेडगे, शानू उर्फ सौरभ दिघे, मनीष ईमालिया, प्रशांत सोनी, प्रणय चितोडा और अमित कोकाटे सहित कई अन्य सहयोगियों के खिलाफ हत्या के प्रयास (अटेंप्ट टू मर्डर) जैसी गंभीर कानूनी धाराओं के तहत मुकदमा पंजीकृत कर लिया है।

बीजेपी के दो आंतरिक गुटों के बीच वर्चस्व की लड़ाई का संदेह

शहरी राजनीति के जानकारों और स्थानीय सूत्रों का दावा है कि इस विवाद को महज एक श्वान को घुमाने की मामूली लड़ाई के चश्मे से नहीं देखा जा सकता। दरअसल, विवाद की अग्रिम पंक्ति में शामिल दूसरा पक्ष भी सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी से ही सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है और दोनों ही गुटों के बीच क्षेत्र में लंबे समय से आंतरिक खींचतान चल रही थी। सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर चल रही जबरदस्त चर्चाओं में भी इसे क्षेत्र क्रमांक-4 की गहरी राजनीतिक गुटबाजी और आपसी वर्चस्व की जंग से जोड़कर देखा जा रहा है। फिलहाल इस मामले पर दोनों ही पक्षों के वरिष्ठ नेताओं ने चुप्पी साध रखी है और कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि वे मामले के राजनीतिक और व्यक्तिगत दोनों ही पहलुओं की गहराई से तफ्तीश कर रहे हैं और तथ्यों के आधार पर आगे की सख्त दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।