नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के मध्य छिड़े भीषण युद्ध के चलते दुनिया भर में ऊर्जा संकट गहरा गया है। इस तनावपूर्ण माहौल के बीच भारतीय बाजारों में भी ईंधन की कीमतों पर असर देखा जा रहा है। मिडिल ईस्ट में नए सिरे से उपजे इस सैन्य संकट को देखते हुए देश में पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और रसोई गैस (एलपीजी) के दामों में हाल ही में आंशिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वैश्विक उथल-पुथल के इस दौर में देश की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने एक विशेष साक्षात्कार के दौरान विस्तार से बताया कि वर्तमान में भारत के पास घरेलू खपत को पूरा करने के लिए कितने समय का पेट्रोलियम रिजर्व उपलब्ध है।
भारत के पास दो महीने का पर्याप्त बैकअप और खपत घटाने की जरूरत नहीं
एक विशेष साक्षात्कार के दौरान केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने देशवासियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में भारत के भीतर कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और एलपीजी की आपूर्ति में कहीं कोई बाधा नहीं है। जब उनसे मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में पिछले दो दिनों से बिगड़ते हालात और देश के रणनीतिक तेल भंडारों की स्थिति को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि यदि यह तनावपूर्ण स्थिति आगामी 30 से 60 दिनों तक भी खिंचती है, तो भारत इसे बेहद सुगमता से संभालने की क्षमता रखता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संकटकाल में प्रबंधन का एक तरीका खपत को कम करना होता है, परंतु इस समय देश में ऐसी कोई आपात स्थिति नहीं है कि नागरिकों को ईंधन के उपयोग में कटौती करनी पड़े। उन्होंने खुलासा किया कि भारत के पास इस वक्त 60 दिनों का क्रूड ऑयल, 60 दिनों की नेचुरल गैस और दो महीने से भी अधिक समय का एलपीजी सिलेंडर का सुरक्षित भंडार (बफर स्टॉक) रिजर्व में मौजूद है।
रूस-यूक्रेन संकट से लेकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी तक कीमतों पर नियंत्रण
पेट्रोलियम मंत्री ने वैश्विक संघर्षों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने लंबे समय तक ईंधन की कीमतों को स्थिर बनाए रखा था। साल 2022 के शुरुआती महीनों के बाद से देश में पेट्रोल-डीजल की दरों को नियंत्रण में रखा गया, जबकि इस चार साल की अवधि में दुनिया ने कई विनाशकारी युद्ध देखे हैं। उन्होंने बताया कि पहले साल 2022 से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध और उसके बाद इस साल 28 फरवरी, 2026 से भड़के अमेरिका-इजरायल और ईरान के महायुद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' में आंशिक नाकेबंदी की स्थिति बनी हुई है। इन तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद, वैश्विक स्तर के मुकाबले भारतीय उपभोक्ताओं पर महंगाई का बोझ बेहद सीमित रहा है।
प्रधानमंत्री द्वारा उत्पाद शुल्क में कटौती और जापान के बाद भारत सबसे सुरक्षित
केंद्रीय मंत्री ने आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि आज वैश्विक स्तर पर जापान के अलावा भारत ही एकमात्र ऐसा देश है, जिसने वैश्विक ऊर्जा संकट और युद्ध के बावजूद अपने नागरिकों के लिए पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में सबसे कम वृद्धि की है। उन्होंने इस राहत का पूरा श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी नीतियों को देते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने देश की जनता को महंगाई से बचाने के लिए तीन बार सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी (केंद्रीय उत्पाद शुल्क) में बड़ी कटौती की है। सरकार द्वारा यह रियायत पहली बार नवंबर 2021 में, दूसरी बार मई 2022 में और तीसरी बार हाल ही में कुछ समय पहले दी गई है, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम आसमान छूने के बावजूद भारत में ईंधन की दरें आम आदमी के बजट के नियंत्रण में बनी हुई हैं।









