नाराज पितरों को मनाने के लिए साल में कई तिथियों का आगमन होता है. इन तिथियों पर अपने पितरों के निमित्त कोई भी धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ, जप-तप आदि किया जाए, तो नाराज पितृ प्रसन्न हो जाते हैं. ऐसे ही मलमास यानी अधिक मास में मांगलिक कार्य या शुभ कार्य करना वर्जित होता है. भगवान विष्णु को प्रिय इस मास में पूजा पाठ करने का महत्व होता है.
संयोग से संवत 2083 के ज्येष्ठ मास में अधिक मास की अमावस्या का आगमन सोमवार के दिन होगा. सोमवती अमावस्या से ठीक 1 दिन पहले पितृ कार्येषु अमावस्या होगी, जो नाराज पितरों को मनाने के लिए सर्वश्रेष्ठ तिथि बताई गई है. चलिए विस्तार से जानते हैं पितृ कार्येषु अमावस्या पर क्या उपाय करने से लाभ होगा?
पितृ दोष के ये संकेत
पितृ कार्येषु अमावस्या पर प्रकाश डालते हुए उत्तराखंड के हरिद्वार के ज्योतिषी पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि संवत में होने वाली कुछ तिथियां बेहद खास होती हैं. ऐसे ही अधिक मास की अमावस्या 15 जून सोमवार के दिन होने से साधकों को इसका विशेष लाभ मिलेगा. सोमवती अमावस्या से एक दिन पहले नाराज पितरों को मनाने और पितृ दोष की शांति के लिए पितृ कार्येषु अमावस्या का आगमन 14 जून को होगा. पितरों के नाराज होने से कार्यो में बाधा बनी रहती है. बनते-बनते कार्यों का बिगाड़ना, तरक्की में रुकावट आना, बुरे सपने आना, सपने में सांप का दिखाना, सपने में पितरों का चित्र दिखाना आदि सभी पितृ दोष के संकेत होते हैं.
नाराज पितरों को ऐसे करें प्रसन्न
ज्योतिषी पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि शास्त्रों में पितृ कार्येषु अमावस्या का विशेष महत्व बताया गया है. 14 जून को होने वाले पितृ कार्येषु अमावस्या पर यदि नाराज पितरों को मनाने के लिए उनका पिंडदान, तर्पण, पितृ गायत्री का पाठ, पितरों को तिलांजलि, जलांजलि, पितरों की शांति के लिए हवन, जप-तप आदि किया जाए तो नाराज पितृ प्रसन्न होकर अपने धाम लौट जाते हैं.
पंडित श्रीधर शास्त्री आगे बताते हैं कि पितरों के निमित्त पिंडदान आदि सभी कार्य 14 जून की दोपहर 3:00 बजे से पूर्व करने पर ही लाभ मिलेगा. यह सभी कार्य करने के बाद अपने सामर्थ्य के अनुसार अपने पितरों को प्रिय वस्तुएं दान देने पर अटके हुए सभी कार्यों में तेजी आएगी और तरक्की के द्वार खुल जाएंगे.









