संगठन से लेकर चुनावी रणनीति तक, खरगे की बैठक में कई मुद्दों पर हुई चर्चा

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नई दिल्ली। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में गुरुवार को पार्टी के सभी केंद्रीय महासचिवों, राज्य प्रभारियों और प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) के अध्यक्षों की एक अत्यंत महत्वपूर्ण आपातकालीन बैठक संपन्न हुई। नई दिल्ली के इंदिरा भवन में आयोजित इस उच्च स्तरीय बैठक में देश के मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य और भविष्य की रणनीतियों पर गहन मंथन किया गया। इस बैठक में मुख्य रूप से कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, जयराम रमेश और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल उपस्थित रहे। इनके अलावा असम प्रदेश कांग्रेस के गौरव गोगोई, मध्य प्रदेश के प्रभारी हरीश चौधरी, तेलंगाना कांग्रेस अध्यक्ष बोम्मा महेशकुमार गौड़, गोवा के गिरीश चोडंकर और पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग सहित कई अन्य राज्यों के दिग्गज नेताओं ने भी इसमें हिस्सा लिया।

हर दो महीने में होगी विपक्षी गठबंधन की बैठक

बैठक के पृष्ठभूमि की जानकारी देते हुए पार्टी सूत्रों ने बताया कि यह मंथन सोमवार को मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में हुई 'इंडिया' गठबंधन की व्यापक बैठक के ठीक बाद आयोजित किया गया है। कांग्रेस अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर विपक्षी दलों के बीच आपसी तालमेल को और अधिक मजबूत करने तथा सत्तापक्ष की नीतियों का पुरजोर मुकाबला करने के लिए गठबंधन के सहयोगी दल अब प्रत्येक दो महीने में एक औपचारिक बैठक करेंगे। सोमवार को हुई बैठक में देश की 25 प्रमुख विपक्षी पार्टियों ने अपनी एकजुटता प्रदर्शित की थी, और इसी कड़ी में यह निर्णय लिया गया है कि 'इंडिया' ब्लॉक की अगली महाबैठक आगामी अगस्त महीने में हैदराबाद में आयोजित की जाएगी।

चुनावी कदाचार को लेकर मुख्य न्यायाधीश को भेजा जाएगा पत्र

बैठक के दौरान लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और चुनावी पारदर्शिता को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की गई। कांग्रेस नेतृत्व ने जानकारी दी कि 'इंडिया' गठबंधन में शामिल सभी दलों ने सर्वसम्मति से चुनाव में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), मतों की हेराफेरी और अन्य चुनावी अनियमितताओं के गंभीर मुद्दों पर भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) को एक संयुक्त पत्र लिखने का संकल्प लिया है। इस शिकायत पत्र को अंतिम रूप देकर बहुत जल्द ही मुख्य न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की शुचिता को बनाए रखने के लिए न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की जा सके।

नीट और सीबीएसई विवाद पर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग

राजनीतिक मुद्दों के साथ-साथ इस बैठक में देश के युवाओं और छात्रों के हितों से जुड़े मामलों पर भी कड़ा रुख अपनाया गया। कांग्रेस और विपक्षी दलों ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) और सीबीएसई परीक्षाओं के संचालन में सामने आई कथित विसंगतियों व धांधली को लेकर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। बैठक में एक सुर में यह मांग उठाई गई कि देश के लाखों छात्र-छात्राओं के भविष्य और उनके भरोसे के साथ जो खिलवाड़ हुआ है, उसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री को अपने पद से तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए।