लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बुधवार और बृहस्पतिवार को आए भीषण आंधी-तूफान और झमाझम बारिश ने भारी तबाही मचाई है। सूबे के अलग-अलग हिस्सों में तेज हवाओं के कारण पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ गए, जिससे कई जिलों में ब्लैकआउट जैसे हालात बन गए। इस प्राकृतिक आपदा के कारण हुए हादसों में कौशाम्बी में दो, जबकि झांसी, बरेली, अलीगढ़, देवरिया और मेरठ में एक-एक व्यक्ति समेत कुल सात लोगों की जान चली गई है। कई लोग घायल भी हुए हैं।
बरेली और मेरठ में ब्लैकआउट जैसे हालात, इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान
तूफान का सबसे ज्यादा असर पश्चिमी यूपी और ब्रज क्षेत्र में देखने को मिला। बरेली में करीब 200 बिजली के खंभे गिरने से पूरी सप्लाई ठप हो गई। यहाँ एक दरोगा समेत 9 लोग जख्मी हुए हैं। अलीगढ़ में सीमेंट फैक्ट्री की चेक पोस्ट गिरने से एक सुरक्षाकर्मी की मलबे में दबकर मौत हो गई। वहीं मुजफ्फरनगर में दीवार गिरने से एक मजदूर ने दम तोड़ दिया।
मेरठ में चक्रवाती हवाओं के कारण लगभग 70 पेड़ और 100 से ज्यादा बिजली के पोल जमींदोज हो गए। बुलंदशहर में एक घर की छत पर मोबाइल टावर गिर गया, जबकि मथुरा में 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आए बवंडर ने दर्जनों गांवों की बिजली गुल कर दी।
पूर्वांचल में आकाशीय बिजली का कहर
पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों में भी मौसम ने भारी नुकसान पहुंचाया है। देवरिया के जोगिया गांव में आकाशीय बिजली की चपेट में आने से एक बुजुर्ग महिला की मौत हो गई। मऊ, बलिया, जौनपुर और चंदौली में भी सैकड़ों पेड़ और बिजली के तार टूटने से 100 से अधिक गांवों में अंधेरा छा गया। मऊ में बिजली गिरने से एक युवक गंभीर रूप से झुलस गया।
भारी बारिश से गिरा पारा, आज भी 'ऑरेंज अलर्ट'
राहत की बात यह रही कि इस मानसूनी हलचल से प्रदेशवासियों को भीषण गर्मी से बड़ी राहत मिली है। गोरखपुर में सबसे ज्यादा 75 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई, जबकि बलिया, बाराबंकी और संतकबीरनगर में भी झमाझम पानी बरसा।
मौसम विभाग (आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र, लखनऊ) के अनुसार, शुक्रवार (12 जून) को भी पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय रहने के कारण प्रदेश के 19 जिलों में आंधी-तूफान का 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया गया है, जबकि 12 जिलों में ओलावृष्टि की संभावना है। शनिवार (13 जून) से मौसम धीरे-धीरे साफ होने लगेगा और तापमान में एक बार फिर बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी।









