PCC चीफ पटवारी का ऐलान- न डरेंगे, न रुकेंगे, संघर्ष रहेगा जारी

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नई दिल्ली। मध्य प्रदेश कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने राज्यसभा चुनाव के लिए पार्टी उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र खारिज होने के खिलाफ दिल्ली की सड़कों पर उतरकर तीखा विरोध जताया। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपति भवन की ओर कूच करने का प्रयास किया, जहाँ प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की देखने को मिली। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने कई आंदोलनकारियों को हिरासत में ले लिया।

जीतू पटवारी और जयवर्धन सिंह ने केंद्र सरकार को घेरा

नामांकन निरस्त होने पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया के माध्यम से केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष देश के संविधान को कमजोर करने का प्रयास कर रहा है और मौजूदा शासन में लोकतांत्रिक मूल्य खतरे में हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। वहीं, कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने भाजपा पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पूरी तरह वैध था। उन्होंने चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट से राहत न मिलने पर असंतोष जताते हुए संकल्प लिया कि जब तक न्याय नहीं मिलता, कांग्रेस का यह आंदोलन थमेगा नहीं।

संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर हरीश चौधरी के सवाल

मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी हरीश चौधरी ने इस पूरे घटनाक्रम को देश में एकदलीय व्यवस्था (ऑटोक्रेसी) की शुरुआत बताया। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया से देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को हटाकर सरकार ने इस संवैधानिक संस्था को अपने नियंत्रण में ले लिया है। चौधरी ने दावा किया कि मीनाक्षी नटराजन ने सभी तय नियमों और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत ही अपना पर्चा दाखिल किया था, लेकिन इसके बावजूद दुर्भावनापूर्ण तरीके से उसे निरस्त कर दिया गया।

देश में चुनावी सत्तावाद के बढ़ते खतरे पर सिंघार की चिंता

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने देश की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भारत तेजी से 'इलेक्टोरल ऑटोक्रेसी' (चुनावी सत्तावाद) की तरफ बढ़ रहा है। उन्होंने वैश्विक स्तर की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि आज देश में ऐसी स्थितियां बन रही हैं जहाँ विपक्ष और स्वतंत्र मीडिया को लगातार कमजोर किया जा रहा है। सिंघार ने आरोप लगाया कि शक्तियों का केंद्रीयकरण करके नागरिकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया जा रहा है, जो लोकतंत्र के लिए एक बेहद गंभीर विषय है।