शेयर बाजार में शानदार शुरुआत, हरे निशान पर सेंसेक्स-निफ्टी; रुपया 53 पैसे मजबूत

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मुंबई। अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर आए सकारात्मक संकेतों के चलते घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत आज शानदार बढ़त के साथ हुई। ईरान और अमेरिका के बीच पिछले 107 दिनों से चला आ रहा संघर्ष समाप्त होने की आधिकारिक घोषणा के बाद न केवल भारत, बल्कि पूरे एशियाई बाजारों में जबरदस्त रौनक देखने को मिल रही है। इस भू-राजनीतिक राहत के बीच शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया भी 53 पैसे मजबूत हो गया। बाजार खुलने के साथ ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 1080 अंकों की भारी उछाल के साथ कुलांचे भरने लगा, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी 330 अंकों की तेजी के साथ हरे निशान पर कारोबार करता दिखा। सेंसेक्स की शीर्ष 30 कंपनियों में इंडिगो, इटरनल, बजाज फाइनेंस और एशियन पेंट्स के शेयरों में सबसे ज्यादा खरीदारी देखी गई, वहीं निफ्टी के टॉप गेनर्स में श्रीराम फाइनेंस और टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स (TMPV) भी शामिल रहे।

वैश्विक शांति समझौते से एशियाई बाजारों में चौतरफा रौनक

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते का एलान किए जाने के बाद से ही दुनिया भर के निवेशकों का उत्साह सातवें आसमान पर पहुंच गया। इस ऐतिहासिक घोषणा और व्यापार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के दोबारा खुलने की खबर से एशिया-प्रशांत क्षेत्र के बाजारों में तेजी की लहर दौड़ गई। जापान का निक्केई सूचकांक इंट्राडे कारोबार के दौरान 4 फीसदी से अधिक की छलांग लगाकर अपने रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इसी तरह, दक्षिण कोरिया के कोस्पी (Kospi) सूचकांक में 4.3 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया, जबकि ऑस्ट्रेलियाई शेयर बाजार का बेंचमार्क इंडेक्स एएसएक्स200 (ASX200) भी 125 अंकों की बढ़त के साथ 8928 के स्तर पर ट्रेंड करता नजर आया, जहां 11 में से 7 प्रमुख सेक्टर बढ़त के साथ काम कर रहे थे।

कच्चे तेल के दामों में भारी गिरावट से घरेलू बाजार को राहत

युद्ध विराम की घोषणा का सबसे बड़ा और सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है, जहां प्रति बैरल दाम में 3 डॉलर से ज्यादा की बड़ी कटौती देखने को मिली। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव 3.45 डॉलर टूटकर 83.88 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, वहीं अमेरिकी बेंचमार्क क्रूड (WTI) भी 3.95 डॉलर की गिरावट के साथ 80.93 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के नरम होने से भारतीय बाजार में भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती की उम्मीदें जाग गई हैं।

बाजार विश्लेषकों का नजरिया और आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियां

हालांकि बाजार इस समय पूरी तरह उत्साह में डूबा है, लेकिन आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि इतनी जल्दी सब कुछ सामान्य होना थोड़ा मुश्किल है। विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक चले इस संघर्ष के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) में जो व्यवधान आया था, उसे पूरी तरह ठीक होने और तेल बाजार को स्थिरता की पटरी पर लौटने में अभी कुछ महीनों का समय लग सकता है। युद्ध के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में जो अप्रत्याशित उछाल आया था, उसने ईंधन और अन्य कई जरूरी उत्पादों की लागत को काफी बढ़ा दिया था, जिससे उबरने में थोड़ा वक्त लगेगा।