प्रयागराज। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) ने प्रदेश के शिक्षा ढर्रे को दुरुस्त करने के लिए एक बहुत बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। बोर्ड मुख्यालय प्रयागराज से जारी आधिकारिक आदेश के मुताबिक, राज्य के 465 स्ववित्तपोषित (प्राइवेट) विद्यालयों की मान्यता तत्काल प्रभाव से खत्म कर दी गई है। इन डिफाल्टर स्कूलों में सबसे ज्यादा गाजीपुर जिले के 47 संस्थान शामिल हैं, जबकि प्रयागराज के 25, कौशाम्बी के 11 और प्रतापगढ़ के 10 स्कूलों समेत राज्य के विभिन्न जिलों के स्कूल इस कार्रवाई की जद में आए हैं। बोर्ड ने यह सख्त कदम इसलिए उठाया क्योंकि इन विद्यालयों में शैक्षणिक सत्र 2024-2025 और 2025-2026 के दौरान न तो कोई कक्षाएं लगीं और न ही कोई छात्र बोर्ड परीक्षाओं में शामिल हुआ। बोर्ड के नियमों के तहत लगातार दो वर्षों तक पूरी तरह निष्क्रिय रहने वाले स्कूलों की मान्यता खुद-ब-खुद निरस्त मानी जाती है।
इस पूरे मामले पर माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह ने स्थिति साफ करते हुए बताया कि लगातार दो सालों तक पढ़ाई ठप रहने और जीरो छात्र उपस्थिति के चलते इन प्राइवेट स्कूलों की मान्यता स्वतः समाप्त हो गई है। बोर्ड द्वारा इस बड़ी कार्रवाई की पूरी लिस्ट और ब्योरा उत्तर प्रदेश के सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों (DIOS) को भेज दिया गया है। विभाग का कहना है कि यह कदम शिक्षा के स्तर को सुधारने और फर्जी या सिर्फ कागजों पर चल रहे स्कूलों को बंद करने के लिए बेहद जरूरी था।
क्या कहता है मान्यता समाप्ति का कानूनी प्रावधान?
इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम 1921 के तहत बनाए गए बोर्ड नियमावली के अध्याय सात में स्कूलों की मान्यता से जुड़े कड़े प्रावधान तय किए गए हैं। इसी नियम के सेक्शन 11 (ढ़) में यह साफ लिखा गया है कि यदि कोई हाईस्कूल या इंटरमीडिएट स्तर का नया मान्यता प्राप्त स्कूल लगातार दो शैक्षणिक कैलेंडर वर्ष तक पूरी तरह बंद रहता है, वहाँ रेगुलर कक्षाएं नहीं लगती हैं या बोर्ड परीक्षा के लिए एक भी परीक्षार्थी पंजीकृत नहीं होता है, तो ऐसे संस्थानों को दी गई सरकारी मान्यता को तत्काल प्रभाव से समाप्त मान लिया जाएगा।
उत्तर प्रदेश के इन जिलों में बंद हुए सबसे ज्यादा स्कूल:
बोर्ड द्वारा जारी आधिकारिक सूची के अनुसार, प्रदेश के लगभग हर हिस्से में ऐसे निष्क्रिय स्कूल पाए गए हैं। इनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित जिलों के स्कूल शामिल हैं:
प्रयागराज मंडल: प्रयागराज के 25, कौशाम्बी के 11, प्रतापगढ़ के 10 और फतेहपुर के 13 स्कूल।
वाराणसी व आजमगढ़ मंडल: गाजीपुर के रिकॉर्ड 47, आजमगढ़ के 16, जौनपुर के 10, बलिया के 10, मिर्जापुर के 6 और वाराणसी के 4 स्कूल।
कानपुर व लखनऊ मंडल: कानपुर नगर के 19, लखनऊ के 15, हरदोई के 14, कन्नौज के 9, उन्नाव के 2 और रायबरेली के 5 स्कूल।
पश्चिम यूपी व ब्रज क्षेत्र: एटा के 18, अलीगढ़ के 14, आगरा के 12, मथुरा के 11, मैनपुरी के 10, फिरोजाबाद के 9 और गाजियाबाद के 6 स्कूल।
अन्य जिले: संतकबीर नगर के 12, मुरादाबाद के 9, अयोध्या के 8, सुल्तानपुर के 8, गोरखपुर के 8 और सोनभद्र के 15 स्कूलों समेत बागपत, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, रामपुर, लखीमपुर खीरी, झांसी तथा ललितपुर जैसे जिलों के भी 1-1 स्कूल इस कार्रवाई की चपेट में आए हैं।
इस बड़ी तालाबंदी के बाद अब शिक्षा विभाग इन क्षेत्रों के पंजीकृत छात्रों को नजदीकी सक्रिय स्कूलों में समायोजित करने की तैयारी कर रहा है ताकि किसी भी बच्चे की पढ़ाई का नुकसान न हो।









