मुंबई। महाराष्ट्र विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव के परिणामों में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन ने एक बार फिर अपना सियासी लोहा मनवाया है। कुल 17 सीटों पर हुए इस चुनावी समर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), शिवसेना (शिंदे गुट) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) के त्रिशूल ने 16 सीटों पर परचम लहराकर विपक्षी खेमे को पस्त कर दिया है। हालांकि, नासिक सीट के नतीजों ने सत्तारूढ़ गठबंधन के स्वाद को थोड़ा फीका कर दिया, जहां भाजपा के ही एक बागी नेता ने निर्दलीय ताल ठोकते हुए आधिकारिक शिवसेना प्रत्याशी को शिकस्त दे दी। इस इकलौती हार को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की रणनीतिक विफलता के रूप में देखा जा रहा है। गौरतलब है कि इन 17 सीटों में से छह पर पहले ही निर्विरोध फैसला हो चुका था, जबकि बाकी बची 11 सीटों के परिणाम सोमवार को सार्वजनिक किए गए, जिनमें अकेले भाजपा ने नौ सीटों पर एकतरफा जीत हासिल की है।
नासिक में बागी का दांव और महायुति के विजयी चेहरों का ब्योरा
इस पूरे चुनाव में नासिक सीट का मुकाबला सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहा, जहां मुख्यमंत्री गुट के उम्मीदवार नरेंद्र दराडे को निर्दलीय प्रत्याशी गोकुल गिट्टे के हाथों पराजय का सामना करना पड़ा। गोकुल गिट्टे मूल रूप से भाजपा से जुड़े थे, लेकिन टिकट न मिलने के बाद उन्होंने बगावत कर दी थी। गठबंधन ने अपनी साख बचाने के लिए पार्षदों की बाड़ेबंदी करते हुए उन्हें ठाणे के एक आलीशान होटल में भी रोका था, फिर भी भीतरघात को नहीं रोका जा सके। दूसरी ओर, महायुति ने राज्य के अन्य गढ़ों में शानदार प्रदर्शन किया है। चुनावी मैदान में जीत दर्ज करने वाले प्रमुख उम्मीदवारों में नांदेड़ से भाजपा के अमरनाथ राजूरकर, नागपुर उपचुनाव से डॉ. राजीव पोतदार, भंडारा-गोंदिया से अविनाश ब्रह्मांकर, छत्रपति संभाजीनगर-जालना से सुहास शिरसाट और जलगांव से नंदकिशोर महाजन शामिल हैं। इसके अलावा सांगली-सातारा से पेशेंस कदम, सोलापुर से राजेंद्र राउत, धाराशिव-लातूर-बीड से बसवराज पाटिल और अमरावती से प्रवीण पोटे भी विजयी रहे, जबकि परभणी-हिंगोली सीट पर शिवसेना के सईद खान ने परचम लहराया।
निर्विरोध चुने गए सदस्य और निर्विवाद राजनीतिक वर्चस्व
चुनावी प्रक्रिया के शुरुआती चरण में ही 17 में से छह सीटों पर उम्मीदवारों का निर्विरोध चयन हो गया था, जिससे महायुति की राह पहले ही आसान हो गई थी। बिना किसी विरोध के उच्च सदन पहुंचने वाले नेताओं में वर्धा-गडचिरोली-चंद्रपुर क्षेत्र से भाजपा के अरुण लखानी, ठाणे से शिवसेना के कद्दावर नेता रवींद्र फाटक और रायगढ़-रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग से एनसीपी के अनिकेत तटकरे शामिल हैं। इनके अलावा यवतमाल सीट से शिवसेना के दुष्यंत चतुर्वेदी, अहिल्यानगर से भाजपा के प्राजक्त तनपुरे और पुणे से एनसीपी के विक्रम काकड़े ने भी निर्विरोध जीत का प्रमाण पत्र हासिल किया। इन एकतरफा नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सूबे के स्थानीय नीतिगत समीकरणों पर फिलहाल सत्तापक्ष का नियंत्रण बेहद मजबूत है।
आगामी चुनावी जंग पर असर और भविष्य की बड़ी चुनौतियां
राजनीतिक समीक्षकों का मत है कि विधान परिषद के इन नतीजों ने महायुति सरकार के सांगठनिक तालमेल और जमीनी पकड़ को दोबारा प्रमाणित कर दिया है। आगामी विधानसभा और स्थानीय निकाय चुनावों के मुहाने पर खड़ी सत्ताधारी पार्टियों के लिए यह जीत टॉनिक का काम करेगी और उनका मनोबल बढ़ाएगी। इसके विपरीत, महाविकास अघाड़ी (विपक्ष) के लिए यह परिणाम आत्ममंथन करने और अपनी रणनीति को नए सिरे से तैयार करने का अलार्म है। हालांकि, नासिक की हार ने महायुति के शीर्ष नेतृत्व को यह चेतावनी भी दे दी है कि टिकट वितरण से उपजी अंतर्कलह और बागियों के तेवर भविष्य के बड़े चुनावों में उनकी जीत के रथ को रोक भी सकते हैं।









