जेल के भीतर बहा खून, हत्या के मामले में बंद कैदी ने फिर किया कत्ल

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर की जिला जेल से सुरक्षा व्यवस्था को तार-टार कर देने वाली एक बेहद सनसनीखेज और खौफनाक वारदात सामने आई है। जेल के भीतर बनी एक बैरक में एक विचाराधीन बंदी (अंडरट्रायल कैदी) की बेरहमी से हत्या कर दी गई। वारदात को अंजाम देने का आरोप तिहरे हत्याकांड के मामले में पहले से ही आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा भुगत रहे एक खूंखार कैदी पर लगा है, जिसने बैरक के अंदर ही दूसरे बंदी के सिर पर भारी पत्थर से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। इस दुस्साहसिक घटना के बाद जेल प्रबंधन, वहां की आंतरिक सुरक्षा और प्रहरियों की मुस्तैदी पर बेहद गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

बैरक के भीतर अचानक खूनी खेल; बंदियों में मची चीख-पुकार

जेल सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, यह खूनी वारदात मंगलवार सुबह उस वक्त हुई जब बैरक नंबर के भीतर कई कैदी मौजूद थे। रोज की तरह सुबह के समय सभी बंदी अपनी सामान्य गतिविधियों और बातचीत में व्यस्त थे। इसी दौरान अचानक सजायाफ्ता कैदी ने बैरक में ही रखे एक भारी-भरकम पत्थर को उठाया और दूसरे बंदी के सिर पर पूरी ताकत से दे मारा।

अचानक हुए इस जानलेवा हमले से पूरी बैरक में अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई। वहां मौजूद अन्य बंदियों ने हिम्मत दिखाकर किसी तरह हमलावर कैदी को पकड़ा और उसे काबू में किया। इधर, लहूलुहान हालत में जमीन पर गिरे गंभीर रूप से घायल बंदी को जेल प्रहरियों की मदद से तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे बचाने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।

हाई-सुरक्षा और विशेष निगरानी वाली बैरक में थे दोनों कैदी

इस वारदात ने जेल प्रशासन को इसलिए भी कटघरे में खड़ा कर दिया है क्योंकि मृतक और आरोपी दोनों ही कोई आम कैदी नहीं थे। जेल प्रबंधन के अनुसार, दोनों बंदियों की विशेष चिकित्सकीय और मानसिक स्थिति को देखते हुए उन्हें सामान्य कैदियों से अलग एक 'विशेष निगरानी' (स्पेशल ऑब्जर्वेशन) वाली बैरक में रखा गया था। दोनों ही कैदियों को कुछ गंभीर स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं थीं और वे जेल के डॉक्टरों के नियमित उपचार के दायरे में थे। ऐसे में सवाल यह उठता है कि विशेष निगरानी वाली बैरक के भीतर इतना बड़ा और भारी पत्थर आखिर आया कहां से?

सजा माफी की अर्जी खारिज होने से डिप्रेशन में था हत्यारा!

पुलिस और जेल मैन्युअल की शुरुआती जांच में इस कत्ल के पीछे एक बेहद चौंकाने वाली वजह सामने आ रही है। पता चला है कि आजीवन कारावास काट रहे आरोपी कैदी ने हाल ही में अपनी सजा कम करने या माफी के लिए शासन के समक्ष एक दया याचिका (अर्जी) लगाई थी, जिसे कुछ दिनों पहले ही कानूनी आधार पर खारिज (अस्वीकृत) कर दिया गया था।

माना जा रहा है कि अर्जी खारिज होने के बाद से ही वह गहरे मानसिक तनाव और डिप्रेशन में चल रहा था। पुलिस अब इस मुख्य पहलू की बारीकी से तफ्तीश कर रही है कि क्या उसने यह आत्मघाती कदम सिर्फ अपनी इसी नाराजगी और हताशा के कारण उठाया या फिर दोनों बंदियों के बीच जेल के भीतर कोई पुराना विवाद या रंजिश चल रही थी।

जेल महकमे में हड़कंप; उच्च स्तरीय जांच के आदेश

जेल के भीतर हुए इस मर्डर से पूरे प्रदेश के जेल महकमे में हड़कंप मच गया है। स्थानीय थाना पुलिस ने जेल प्रबंधन की शिकायत पर आरोपी कैदी के खिलाफ हत्या का एक नया मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस की फॉरेंसिक टीम और मजिस्ट्रेट जांच के जरिए घटना के समय बैरक की सुरक्षा में तैनात प्रहरियों के बयानों को दर्ज किया जा रहा है। अधिकारियों का साफ कहना है कि जांच में यदि जेल प्रशासन या किसी प्रहरी की लापरवाही उजागर होती है, तो उस पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।