घेरे हो आर्थिक तंगी या जोंख की तरह चिपक गया हो असाध्य रोग…निर्जला एकादशी दिलाएगी मुक्ति

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एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है. एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा आराधना करने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है. धार्मिक ग्रंथों, वेदों-पुराणों के अनुसार एक संवत में 24 एकादशियों का आगमन मानव कल्याण के लिए होता है. एकादशी का व्रत विधिपूर्वक करने पर जीवन में चल रही सभी समस्याएं खत्म हो जाती हैं और भगवान विष्णु की कृपा सदैव बनी रहती है. सभी एकादशियों में निर्जला एकादशी का अपना ही महत्व बताया गया है. सबसे कठिन और सभी एकादशियों का फल प्रदान करने वाली निर्जला एकादशी विशेष नक्षत्र और योग में होने के कारण जातकों को इसका दोगुना लाभ मिलेगा.

सबसे ज्यादा ये वाली खास
ज्येष्ठ शुद्ध शुक्ल पक्ष में होने वाली निर्जला एकादशी के महत्व के बारे में पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि एक संवत में 24 एकादशी होती है, जिसमें 12 एकादशी कृष्ण पक्ष और 12 एकादशी शुक्ल पक्ष में आती हैं. सभी 24 एकादशियों में ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष में होने वाली निर्जला एकादशी का सबसे अधिक महत्व बताया गया है. यदि किसी कार्य में बाधा आ रही है, बनते-बनते कार्य बिगड़ रहे हैं, जीवन में आर्थिक तंगी, असाध्य रोग आदि से परेशान हैं तो निर्जला एकादशी का व्रत विधि पूर्वक करने से सब अनुकूल हो जाता है. साल 2026 में निर्जला एकादशी 25 जून गुरुवार को होगी. 25 जून की सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि करके व्रत का संकल्प करें और पूरे दिन निर्जला रहकर मन ही मन भगवान विष्णु की आराधना करने से लाभ की प्राप्ति होती है.

करना क्या-क्या होगा
पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि संयोग से निर्जला एकादशी का आगमन शिव योग और स्वाति नक्षत्र में हो रहा है. शिव योग और स्वाति नक्षत्र में धार्मिक अनुष्ठान करने का संपूर्ण से अधिक कई गुना फल प्राप्त होता है. एकादशी तिथि और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए विष्णु भगवान की आराधना, उनके स्तोत्र, विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ, बीज मंत्र आदि का जाप करने से धार्मिक लाभ होगा. इस दिन व्रत का पालन शास्त्रों में बताई गई विधि अनुसार करें. संयोग से निर्जला एकादशी गुरुवार को होगी, जिस कारण इस व्रत को करने से साधकों को ग्रह बाधा, ग्राहक कलेश, कार्यों में रुकावट आदि सभी से निजात मिलेगी और सभी एकादशियों का फल प्राप्त हो जाएगा.